बालेन शाह और सर्जियो गोर के बीच कूटनीतिक ‘डेडलॉक’
काठमांडू: भारत में अमेरिकी राजदूत और डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण एशिया के विशेष दूत सर्जियो गोर गुरुवार को काठमांडू पहुंचे। उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका इस क्षेत्र में चीन के ‘कर्ज जाल’ (Debt Trap) को लेकर लगातार चिंता जता रहा है। गोर का मुख्य उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना और चीनी वर्चस्व को चुनौती देना है। नेपाल(Nepal) पहुंचने से पहले वे बांग्लादेश, भूटान(Bhutan) और श्रीलंका का दौरा कर वहां के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात कर चुके हैं, जिससे साफ है कि वॉशिंगटन इस क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह का सख्त रुख
नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सत्ता संभालने के बाद से विदेशी राजनयिकों से मिलने की पारंपरिक शैली में बड़े बदलाव किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सर्जियो गोर ने पीएम शाह से मुलाकात का समय मांगा है, लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले महीने शाह ने अमेरिकी सहायक विदेश सचिव समीर पॉल कपूर से मिलने से भी इनकार कर दिया था। बालेन शाह का यह व्यवहार संकेत दे रहा है कि वे अपनी विदेश नीति में किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने के बजाय एक स्वतंत्र और दूरी बनाए रखने वाली छवि पेश करना चाहते हैं।
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दक्षिण एशिया में कूटनीतिक होड़
नेपाल में 27 मार्च को राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद से अमेरिका और चीन के बीच प्रभाव बढ़ाने की होड़ तेज हो गई है। 10 दिनों के भीतर दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का नेपाल दौरा इस बात का प्रमाण है कि वॉशिंगटन नई सरकार के साथ रिश्तों को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, बालेन शाह द्वारा अमेरिकी अधिकारियों को समय न देना नेपाल की कूटनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या अमेरिकी दबाव शाह के रुख को बदलने में सफल होगा या नेपाल अपनी नई ‘नेबरहुड पॉलिसी’ पर अडिग रहेगा।
सर्जियो गोर के नेपाल दौरे का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सर्जियो गोर डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत के रूप में नेपाल पहुंचे हैं। उनके दौरे का मुख्य उद्देश्य नेपाल की नई सरकार के साथ संबंधों को बेहतर बनाना और दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव व कर्ज जाल (Debt Trap) के खतरों को कम करना है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह और अमेरिकी दूत की मुलाकात को लेकर संशय क्यों बना हुआ है?
बालेन शाह ने प्रधानमंत्री बनने के बाद विदेशी राजनयिकों से मिलने की पुरानी परंपराओं को बदला है। इससे पहले उन्होंने सहायक विदेश सचिव समीर पॉल कपूर से भी मुलाकात नहीं की थी। अब सर्जियो गोर के साथ बैठक को लेकर भी चुप्पी साधी गई है, जिसे अमेरिका से दूरी बनाने या एक स्वतंत्र कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है।
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