41 साल पहले का वो शेल्टर होम और मेयर का सफर
एम्स्टर्डम: फरवरी 1985 में नागपुर के ‘मातृ सेवा संघ’ में एक 21 वर्षीय अविवाहित मां ने समाज के डर से अपने 3 दिन के बच्चे(Netherlands) को छोड़ दिया था। उस बच्चे का नाम वहां की एक नर्स ने ‘फाल्गुन’ रखा। एक महीने बाद नीदरलैंड के एक दंपत्ति ने उसे गोद लिया और वह बच्चा डच संस्कृति(Culture) में पला-बढ़ा। आज वही बच्चा, फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क, नीदरलैंड के हीमस्टेड शहर का मेयर है। अपनी जड़ों की पुकार उन्हें 41 साल बाद वापस भारत खींच लाई है।
महाभारत का संदर्भ और मां से मिलने की तड़प
फाल्गुन अपनी इस खोज को महाभारत के पात्रों से जोड़कर देखते हैं। उनका कहना है कि “हर कर्ण को अपनी कुंती से मिलने का अधिकार है।” वे अपनी मां को यह बताना चाहते हैं कि उनका पालन-पोषण(Parenting) बहुत प्यार से हुआ है और वे उनके प्रति कोई शिकायत(Netherlands) नहीं रखते। दिसंबर 2025 में अपनी भारत यात्रा के दौरान उन्होंने उस रिटायर हो चुकी नर्स से भी मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें ‘फाल्गुन’ नाम दिया था। फाल्गुन ने अपनी बेटी का नाम भी अपनी जैविक मां के नाम पर रखा है, जो उनकी अटूट ममता को दर्शाता है।
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प्रशासनिक मदद और भविष्य की उम्मीद
नागपुर के कलेक्टर और नगर पालिका आयुक्त ने फाल्गुन के जन्म से जुड़े दस्तावेजों को खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दस्तावेजों से पुष्टि हुई है कि उनकी मां उस समय महज 21 साल की थीं। हालांकि फाल्गुन ने अपनी मां की गोपनीयता(Netherlands) बनाए रखने के लिए उनका नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन वे विभिन्न NGO और पुलिस की मदद से उनकी तलाश जारी रखे हुए हैं। फाल्गुन को विश्वास है कि उनकी मां भी कहीं न कहीं उनसे मिलने की उतनी ही इच्छा रखती होंगी।
हीमस्टेड के मेयर फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क अपनी मां को क्यों ढूंढना चाहते हैं?
फाल्गुन अपनी जैविक जड़ों (Roots) को खोजने और अपनी पहचान को पूरा करने के लिए अपनी मां को ढूंढना चाहते हैं। वे अपनी मां को यह आश्वासन देना चाहते हैं कि उन्हें समाज के डर से उन्हें छोड़ने के लिए दुखी होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनका जीवन बहुत अच्छा रहा है और वे उनसे बिना किसी कड़वाहट के मिलना चाहते हैं।
फाल्गुन के जन्म और नामकरण से जुड़ी क्या विशेष जानकारी सामने आई?
10 फरवरी 1985 को फाल्गुन का जन्म हुआ था। चूंकि उनका जन्म हिंदू कैलेंडर के ‘फाल्गुन’ महीने में हुआ था, इसलिए शेल्टर होम की नर्स ने उनका नाम ‘फाल्गुन’ रखा था। हाल ही में नागपुर यात्रा के दौरान वे उस नर्स से मिले और उन दस्तावेजों को भी देखा जिनमें उनकी मां के अविवाहित होने और समाज के दबाव के कारण उन्हें छोड़ने का जिक्र था।
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