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Pakistan: पाकिस्तान की दो टूक

Dhanarekha
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Pakistan: पाकिस्तान की दो टूक

‘अमेरिका ने हमारा इस्तेमाल टॉयलेट पेपर की तरह किया’

इस्लामाबाद: रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में स्वीकार किया कि पाकिस्तान(Pakistan) ने सैन्य तानाशाहों (जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ) के दौर में अमेरिकी हितों के लिए अफगानिस्तान की जंगों में हिस्सा लेकर बड़ी भूल की। उन्होंने कहा कि मजहब के नाम पर लड़ी गई इन लड़ाइयों का असली मकसद वैश्विक ताकतों(Global Forces) का समर्थन पाना था। आसिफ के अनुसार, 11 सितंबर 2001 के बाद अमेरिका का साथ देने की कीमत पाकिस्तान आज भी आतंकवाद और अस्थिरता के रूप में चुका रहा है

आतंकवाद और सिस्टम पर गहरा प्रहार

आसिफ ने साफ तौर पर माना कि पाकिस्तान का आतंकी इतिहास(Pakistan) रहा है और आज देश में जो भी आतंकवाद है, वह उन्हीं पुरानी गलतियों का नतीजा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन युद्धों को जायज ठहराने के लिए पाकिस्तान की शिक्षा प्रणाली (Education System) में जानबूझकर बदलाव किए गए, जिनका नकारात्मक प्रभाव आज भी सिस्टम में मौजूद है। उन्होंने हाल ही में इस्लामाबाद की शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले की निंदा करते हुए राजनीतिक एकजुटता की अपील भी की।

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भारत के संदर्भ में अमेरिका का रुख

एक ओर जहाँ पाकिस्तान(Pakistan) अपने रिश्तों पर पछतावा जता रहा है, वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ रिश्ते जरूर चाहता है, लेकिन भारत की कीमत पर नहीं। रुबियो के बयान से साफ है कि अमेरिका की विदेश नीति में अब भारत की स्थिति बहुत मजबूत है और वह पाकिस्तान के साथ आतंकवाद विरोधी सहयोग को भारत के साथ अपने रणनीतिक संबंधों के बीच आड़े नहीं आने देगा।

ख्वाजा आसिफ ने बिल क्लिंटन के साल 2000 के दौरे का जिक्र क्यों किया?

आसिफ ने इस दौरे का जिक्र यह दिखाने के लिए किया कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान की अहमियत कितनी कम हो गई थी। राष्ट्रपति क्लिंटन भारत के लंबे दौरे के बाद केवल कुछ घंटों के लिए पाकिस्तान रुके थे, जो यह दर्शाता था कि दोनों देशों का रिश्ता केवल सीमित स्वार्थों और सैन्य शासक मुशर्रफ पर दबाव बनाने तक रह गया था।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के अनुसार वर्तमान आतंकवाद का मुख्य कारण क्या है?

उनके अनुसार, वर्तमान आतंकवाद उन दो सैन्य तानाशाहों की गलतियों का नतीजा है जिन्होंने निजी सत्ता और विदेशी समर्थन के लिए पाकिस्तान को अफगानिस्तान की जंगों में धकेला। उन्होंने इसे पाकिस्तान(Pakistan) के इतिहास की सबसे बड़ी भूल बताया जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।

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