रक्षा सौदे और ‘नमस्ते’ कूटनीति
नई दिल्ली/तेल अवीव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(PM Modi) दो दिवसीय दौरे पर इजराइल पहुंच रहे हैं। उनके स्वागत में इजराइली अखबार ‘द जेरूसलम पोस्ट’ ने अपने फ्रंट पेज पर हिंदी में ‘नमस्ते’ और हिब्रू में ‘शालोम’ लिखकर एक नई मिसाल पेश की है। अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी इजराइल की संसद(Parliament) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे। हालांकि, यह संबोधन स्थानीय राजनीति के कारण चर्चा में है, क्योंकि इजराइली विपक्ष ने चीफ जस्टिस को आमंत्रित न किए जाने के विरोध में सत्र के बहिष्कार(Boycott) की चेतावनी दी है।
रक्षा समझौते और ड्रोन डील पर नजर
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रक्षा सहयोग है। भारत और इजराइल के बीच लगभग 8.6 अरब डॉलर के रक्षा समझौतों पर बातचीत की संभावना है। इसमें विशेष रूप(PM Modi) से ‘हैरोन MK-2 MALE’ ड्रोन की खरीद और जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग शामिल है। यह एडवांस ड्रोन 35 हजार फीट की ऊंचाई पर 45 घंटे तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम है। इसके अलावा, एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम और प्रिसीजन गाइडेड बमों को लेकर भी रणनीतिक साझेदारी को नया विस्तार मिल सकता है।
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सांस्कृतिक जुड़ाव और ‘यद वाशेम’ की यात्रा
अपने दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी(PM Modi) ‘यद वाशेम’ स्मारक जाएंगे, जो यहूदियों के नरसंहार (होलोकॉस्ट) में मारे गए 60 लाख लोगों की याद में बनाया गया है। वहां वे ‘बुक ऑफ नेम्स’ का अवलोकन करेंगे और पीड़ितों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग और पीएम नेतन्याहू के साथ उनकी बैठकों में इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC), आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और एडवांस टेक्नोलॉजी जैसे वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा होगी।
पीएम मोदी की इजराइल यात्रा के दौरान किन प्रमुख हथियारों की डील होने की संभावना है?
इस यात्रा के दौरान मुख्य रूप से ‘हैरोन MK-2’ जैसे एडवांस ड्रोन, एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम और प्रिसीजन गाइडेड बमों को लेकर रक्षा समझौते संभव हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 2026 में दोनों देशों के बीच कुल रक्षा सहयोग 8.6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
इजराइली विपक्ष पीएम मोदी के संसद संबोधन का बहिष्कार क्यों करना चाहता है?
इजराइल के विपक्ष ने संसद के विशेष सत्र के बहिष्कार की योजना इसलिए बनाई है क्योंकि संसद के स्पीकर ने परंपरा के विपरीत सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आइजैक अमीत को इस औपचारिक सत्र में आमंत्रित नहीं किया है। विपक्ष इसे न्यायपालिका के अपमान के तौर पर देख रहा है।
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