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Rafale Deal: राफेल की नई डील

Dhanarekha
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Rafale Deal: राफेल की नई डील

उत्पादन की सुस्ती और भारत की ‘मेक इन इंडिया’ शर्त

पेरिस: फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारत के साथ 114 राफेल फाइटर(Rafale Deal) जेट्स का सौदा इसी साल पूरा करने के लिए बेताब है। हालांकि, कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती(Big Challenge) उत्पादन की धीमी गति है। 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी के पास 220 राफेल विमानों का ऑर्डर पेंडिंग (बैकलॉग) है। पिछले साल कंपनी ने केवल 11 जेट्स की डिलीवरी की थी और 2026 में वह इस संख्या को बढ़ाकर 28 तक ले जाने का लक्ष्य रख रही है। डसॉल्ट के सीईओ एरिक ट्रैपियर के अनुसार, उत्पादन दर बढ़ाने के लिए भारी निवेश और फ्रांस सरकार से स्पष्ट संकेतों की आवश्यकता है

भारत की ‘मेक इन इंडिया’ शर्त और स्थानीय निर्माण

भारत के साथ होने वाले इस संभावित सौदे में सबसे बड़ी शर्त 50% स्वदेशी निर्माण की है। डसॉल्ट ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स(Rafale Deal) के साथ राफेल के फ्यूजलेज सेक्शन बनाने का करार किया है। यह पहली बार होगा जब राफेल के पुर्जे फ्रांस के बाहर बनाए जाएंगे। इस सौदे के तहत भारत में एक ‘फाइनल असेंबली लाइन’ भी स्थापित की जाएगी, जिससे न केवल भारतीय वायुसेना की जरूरतें पूरी होंगी बल्कि भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का हिस्सा भी बन सकेगा।

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आर्थिक स्थिति और भविष्य की योजनाएं

डसॉल्ट एविएशन ने वित्त वर्ष में कुल €7.4 बिलियन (करीब 6.6 लाख करोड़ रुपये) की बिक्री दर्ज की है, जिसमें से बड़ा हिस्सा रक्षा क्षेत्र से आया है। कंपनी(Rafale Deal) का कुल पेंडिंग ऑर्डर बैकलॉग €46.6 बिलियन तक पहुंच गया है, जिसमें से ₹3 लाख करोड़ से ज्यादा का हिस्सा विदेशी निर्यात (भारत, इंडोनेशिया आदि) का है। राफेल के अलावा, कंपनी समुद्री निगरानी के लिए ‘अल्बाट्रोस’ जैसे विशेष मिशन विमानों पर भी काम कर रही है, जिसकी पहली उड़ान जनवरी 2026 में सफल रही है।

डसॉल्ट को भारत के साथ राफेल सौदा पूरा करने में क्या मुख्य बाधा आ रही है?

मुख्य बाधा उत्पादन की धीमी दर और बजट संबंधी दिक्कतें हैं। कंपनी के पास पहले से ही 220 विमानों का बैकलॉग है और उत्पादन बढ़ाने के लिए उसे फ्रांस सरकार से सिग्नल और फंड की जरूरत है।

भारत में राफेल निर्माण के लिए डसॉल्ट ने किस भारतीय कंपनी के साथ हाथ मिलाया है?

डसॉल्ट ने राफेल के फ्यूजलेज (विमान का मुख्य ढांचा) सेक्शन बनाने के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ सौदा साइन किया है।

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