नई दिल्ली,। पाकिस्तान अपने 80 फीसदी हथियार चीन से खरीदता है। यह खुलासा नई रिपोर्ट (New Report) से हुआ है, जिसमें 2025 में दुनियाभर में हुए हथियार सौदों पर फोकस किया गया है। इससे पड़ोसी देश भारत की चिंता बढ़ना स्वभाविक है। वैसे कुछ विश्लेषक इसे भारत के लिए सिर्फ नकारात्मक नहीं बल्कि फायदेमंद भी बता रहे हैं।
दुनिया में हथियारों की खरीद में बढ़ोतरी
इस जारी रिपोर्ट से पता चला है कि 2021–25 के बीच दुनिया के देशों के बीच बड़े हथियारों का ग्लोबल वॉल्यूम पिछले पांच साल के टाइमलाइन की तुलना में 9.2 फीसदी ज्यादा हुआ। 2011-15 के मुकाबले ये सबसे बड़ी छलांग है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पाकिस्तान (Pakistan) अपनी परमाणु और पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है और सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है।
यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में हथियारों की होड़
रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि यूरोपीय देश यूक्रेन युद्ध (Ukraine War) से डरे हुए हैं और उन्होंने हथियारों की खरीद में भारी बढ़ोतरी की है। 2011-15 के मुकाबले 2021–25 के बीच यूरोपीय देशों की हथियार खरीददारी में 210 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पाकिस्तान के हथियार आयात में चीन की बड़ी हिस्सेदारी
रिपोर्ट के मुताबिक 2021-2025 के बीच पाकिस्तान के कुल हथियार आयात में चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 80 फीसदी हो गई है, जो 2016-2020 में 73 फीसदी थी। 2016–20 की तुलना में 2021–25 के दौरान पाकिस्तान के हथियारों के आयात में 66 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
हथियार खरीदने वाले शीर्ष देशों में पाकिस्तान
पाकिस्तान अब दुनिया के उन शीर्ष पांच देशों में शामिल है जो सबसे ज्यादा हथियार खरीदते हैं। इनमें पहले चार स्थानों पर यूक्रेन, भारत, सऊदी अरब और कतर हैं। चीन के बाद पाकिस्तान के मुख्य सप्लायर तुर्की और नीदरलैंड हैं।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता
चीन के हथियारों पर पाकिस्तान की बढ़ती निर्भरता भारत के लिए खतरनाक मानी जा रही है। पिछले साल मई संघर्ष में देखा गया था कि चीन पाकिस्तान को सैटेलाइट और सैन्य मदद दे रहा था। पाकिस्तान का चीनी हथियार खरीदना सिर्फ सैन्य सौदा नहीं बल्कि दक्षिण एशिया के सैन्य संतुलन में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
चीन-पाकिस्तान सैन्य तालमेल का खतरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान चीनी जे-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है। 2021-25 के बीच पाकिस्तान के हथियारों की खरीद में 66 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका मतलब है कि युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान और चीन के हथियार सिस्टम जैसे फाइटर जेट, मिसाइलें और रडार आपस में तालमेल के साथ काम कर सकते हैं।
पाकिस्तान की सैन्य लॉजिस्टिक चीन पर निर्भर
पाकिस्तान की मिलिट्री लॉजिस्टिक तेजी से चीन पर निर्भर होती जा रही है। इसका मतलब है कि चीन और पाकिस्तान भारत से जुड़ा डेटा साझा कर अपने हथियार सिस्टम में शामिल कर सकते हैं। युद्ध के समय चीन आसानी से पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई जारी रख सकता है, जिससे पाकिस्तान लंबी लड़ाई लड़ने में सक्षम हो सकता है।
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भारत के लिए अवसर भी
हालांकि कुछ विश्लेषकों के अनुसार यह स्थिति भारत के लिए पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। भारत को चीन और पाकिस्तान दोनों के हथियार सिस्टम को ध्यान में रखकर एक जैसी तैयारी करनी होगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन के हथियार आयात में 72 फीसदी की कमी आई है, लेकिन रूस अभी भी चीन का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
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