Rupee vs dollar : भारतीय मुद्रा रुपया शुक्रवार को ऐतिहासिक गिरावट के साथ कमजोर हो गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान 94.85 के स्तर तक गिर गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। कारोबार के अंत में रुपया लगभग 0.9 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.81 पर बंद हुआ, जो रिकॉर्ड निचला क्लोजिंग स्तर है।
गिरावट की वजह
रुपये की कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 109.75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस महीने विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 11.5 बिलियन डॉलर निकाल लिए हैं। शुक्रवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब ₹850 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेच दिए। इन कारणों से एशियाई मुद्राओं में रुपया सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से रुपया करीब 4 प्रतिशत तक गिर चुका है, जबकि इस तिमाही में इसकी गिरावट 5.2 प्रतिशत रही है।
अन्य पढ़े: Vijayawada : पोट्टि श्रीरामुलु का बलिदान अमर- नारायण
आरबीआई की दखल
रुपये की गिरावट को रोकने के लिए Reserve Bank of India समय-समय पर बाजार में डॉलर (Rupee vs dollar) बेचकर हस्तक्षेप कर रहा है। हालांकि मुद्रा डीलरों का कहना है कि आरबीआई मुख्य रूप से फॉरवर्ड मार्केट में ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक की यह कार्रवाई गिरावट को पूरी तरह रोक नहीं पा रही है, लेकिन इसे कुछ समय के लिए धीमा जरूर कर रही है। फिलहाल रुपया मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 95 के स्तर के करीब पहुंच गया है, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई है। इसी बीच सरकारी बॉन्ड यील्ड भी लगभग दो साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है और 10 साल की बेंचमार्क यील्ड करीब 6.95 प्रतिशत हो गई है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :