मॉस्को। अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर भारत, अमेरिका (America) और रूस के बीच तेल व्यापार को लेकर जारी बयानबाजी के बीच रूस के विदेश मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि भारत द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) की खरीद न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय हितों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में स्थिरता बनाए रखने के लिए भी एक आवश्यक कदम है।
भारत-रूस ऊर्जा साझेदारी को बताया भरोसेमंद
रूसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत और रूस की साझेदारी दशकों पुरानी और भरोसेमंद है, जो वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है।
ट्रंप के दावे के बाद रूस की प्रतिक्रिया
यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के उस हालिया दावे के बाद आई है, जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का हवाला देते हुए कहा था कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा और वेनेजुएला जैसे विकल्पों पर विचार करेगा।
क्रेमलिन ने अटकलों को किया खारिज
हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बुधवार को इन अटकलों को दरकिनार करते हुए कहा कि रूस कभी भी भारत का एकमात्र तेल आपूर्तिकर्ता नहीं रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी विशाल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हमेशा से विभिन्न देशों से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदता रहा है।
भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह स्वतंत्र
रूस ने अपनी स्थिति मजबूत करते हुए कहा कि भारत की तेल खरीद नीति पूरी तरह से स्वतंत्र है और वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है। मंत्रालय के अनुसार, भारत का रूस के साथ ऊर्जा व्यापार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
भविष्य में भी सहयोग जारी रहने का भरोसा
क्रेमलिन की ओर से जारी बयान में विश्वास जताया गया कि भविष्य में भी तेल, गैस और अन्य ऊर्जा संसाधनों में यह सहयोग बिना किसी बाधा के जारी रहेगा। रूस ने यह भी संकेत दिया कि भारत की ओर से आयात रोकने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।
यूक्रेन युद्ध के बावजूद जारी रहा तेल आयात
उल्लेखनीय है कि यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने अपने नागरिकों को महंगाई से राहत देने के लिए रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना जारी रखा था।
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नेशन फर्स्ट नीति पर कायम भारत
हालांकि व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति ट्रंप लगातार संकेत दे रहे हैं कि भारत अमेरिकी खेमे को प्राथमिकता देगा, लेकिन रूस के इस ताजा बयान ने साफ कर दिया है कि वह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को समझता है। फिलहाल भारत ने अपनी नेशन फर्स्ट नीति के तहत दोनों महाशक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखा है।
डोनाल्ड ट्रंप कितने पढ़े-लिखे हैं?
न्यूयॉर्क शहर के एक धनी परिवार में जन्मे ट्रंप ने 1968 में पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
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