600 डॉलर में रूस के दो पुल तबाह
यूक्रेन की सेना ने रूस(Russia) के बेलगोरोद क्षेत्र में एक बड़ा ऑपरेशन कर उसकी सप्लाई चेन पर करारा प्रहार किया। सिर्फ 600 डॉलर कीमत के ड्रोन की मदद से किए गए इस हमले में दो पुलों को ध्वस्त कर दिया गया। यह पुल खार्किव(Kharkiv) सीमा के पास स्थित थे और रूसी सेना इन्हें सैनिकों व रसद आपूर्ति के लिए इस्तेमाल करती थी। दिलचस्प बात यह रही कि कीव(Kyiv) की सेना ने रूस की ही तैयारियों को उसके खिलाफ इस्तेमाल कर दिया।
यूक्रेनी ब्रिगेड का कमाल
यूक्रेन की 58वीं सेपरेट मोटराइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड ने ऑपरेशन को अंजाम दिया। ब्रिगेड ने सीमा पर असामान्य गतिविधियां देखीं और वहां सामान्य टोही ड्रोन का उपयोग संभव नहीं था, क्योंकि सिग्नल गायब हो जाता। इसके बाद सैनिक फाइबर-ऑप्टिक्स से लैस फर्स्ट-पर्सन व्यू ड्रोन लेकर पहुंचे और हालात का आकलन किया।
जांच में सामने आया कि पुल के नीचे रूसी(Russia) सेना ने एंटी-टैंक माइंस और गोला-बारूद का बड़ा जखीरा छिपा रखा था। इसी हथियार को यूक्रेनी सेना ने उनके खिलाफ इस्तेमाल करते हुए पुल को विस्फोट से उड़ा दिया। सीएनएन ने हमले की जगह की पुष्टि भी की है।
दूसरा पुल भी उड़ाया गया
पहले सफल विस्फोट के बाद सैनिक दूसरे पुल की ओर बढ़े। यहां भी उन्हें बारूदी सुरंगें मिलीं, जिन पर तुरंत हमला किया गया। नतीजा यह हुआ कि दूसरा पुल भी ढह गया और मॉस्को की सप्लाई लाइन को गहरा झटका लगा।
यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि ये विस्फोट रूसी(Russia) रणनीति को उसी पर भारी साबित करते हैं। जिस संसाधन को रूस यूक्रेनी सेना की प्रगति रोकने के लिए तैयार कर रहा था, उसी को कीव के सैनिकों ने उसके खिलाफ मोड़ दिया।
कम खर्च में बड़ा अभियान
ब्रिगेड ने बताया कि ऑपरेशन की लागत बेहद कम रही। प्रत्येक ड्रोन की कीमत केवल 600 से 725 डॉलर थी। आम तौर पर जिस मिशन के लिए महंगी मिसाइल प्रणाली या उन्नत हथियारों की जरूरत होती है, उसे साधारण ड्रोन ने पूरा कर दिया। यह घटना आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक की बदलती भूमिका का स्पष्ट उदाहरण मानी जा रही है।
यूक्रेन ने रूस पर हमला कहां किया?
यूक्रेन ने रूस के बेलगोरोद क्षेत्र में दो पुलों को निशाना बनाया, जो खार्किव सीमा के पास स्थित थे और रूसी सेना की सप्लाई लाइन के लिए अहम थे।
सैनिकों ने रूस के हथियार का कैसे इस्तेमाल किया?
यूक्रेनी सैनिकों ने पुलों के नीचे रखी एंटी-टैंक माइंस और बारूद का उपयोग उन्हीं के खिलाफ किया और विस्फोट से दोनों पुलों को ध्वस्त कर दिया।
इस अभियान की खासियत क्या रही?
अभियान बेहद कम खर्च में पूरा हुआ। केवल 600 डॉलर के ड्रोन ने वह काम कर दिखाया, जिसके लिए आमतौर पर करोड़ों डॉलर की मिसाइलें इस्तेमाल की जाती हैं।
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