मिनेसोटा में कैथोलिक स्कूल हादसा
वॉशिंगटन: अमेरिका के मिनेसोटा(Minnesota) राज्य में बुधवार को हुए स्कूल गोलीबारी(Shooting) के मामले ने पूरे देश को हिला दिया है। कैथोलिक स्कूल में सामूहिक प्रार्थना के दौरान अचानक हुई गोलीबारी में दो बच्चों और हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 14 मासूम बच्चे शामिल हैं। यह दर्दनाक घटना ऐसे समय हुई जब बच्चे छुट्टियों के बाद स्कूल लौटे थे।
हमलावर ने खुद पर चलाई गोली
पुलिस ने जानकारी दी कि हमलावर ने खुद को गोली मार ली, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। शुरुआत में कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि पुलिस ने उसे मार गिराया, लेकिन बाद में सच्चाई स्पष्ट हो गई। घटनास्थल से तीन हथियार बरामद किए गए जिनमें राइफल, शॉटगन और पिस्टल शामिल थे।
मारे गए दोनों बच्चों की उम्र केवल 8 और 10 साल बताई गई है। हादसे के समय दोनों बच्चे बेंच पर बैठे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प(Trump) ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्हें घटना की पूरी जानकारी मिल चुकी है। FBI ने तत्काल कार्रवाई की और हालात पर व्हाइट हाउस भी नजर रख रहा है।
प्रशासन की चेतावनी और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
होमलैंड सिक्योरिटी की सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने कहा कि वे लगातार अन्य एजेंसियों के साथ बातचीत कर रही हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और लोगों से प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने का अनुरोध किया ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए।
इस स्कूल में प्री-स्कूल से लेकर आठवीं तक के बच्चे पढ़ते हैं। वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, स्थानीय समय सुबह 8:15 बजे बच्चे प्रार्थना सभा में शामिल हुए थे। मिनेसोटा की सीनेटर टीना स्मिथ ने कहा कि बच्चों को डर में नहीं जीना चाहिए और पुलिस की तेजी से की गई कार्रवाई के लिए वह आभारी हैं।
गोलीबारी में कितने लोग प्रभावित हुए?
इस घटना में दो मासूम बच्चों और हमलावर की मौत हो गई, जबकि 17 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 14 घायल बच्चे हैं जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।
क्या हमलावर के पास कई हथियार थे?
पुलिस ने बताया कि हमलावर के पास तीन हथियार थे। इनमें एक राइफल, एक शॉटगन और एक पिस्टल शामिल थी, जिन्हें उसने स्कूल परिसर में लाया था।
अमेरिका में गोलीबारी की घटनाओं की स्थिति क्या है?
गन वायलेंस आर्काइव की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई तक अमेरिका में सार्वजनिक जगहों पर हुई गोलीबारी में 262 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यह आंकड़ा समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
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