3 लाख में बिकने के बाद अब नेशनल जू भेजा गया, सरकार लौटाएगी खरीदार के पैसे
ढाका: बांग्लादेश में आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर कुर्बानी के लिए खरीदे गए एक बेहद अनोखे और मशहूर सफेद भैंसे की कुर्बानी पर सरकार ने रोक लगा दी है। करीब 700 किलो वजन वाले इस भैंसे को जिंजिरा के रहने वाले मोहम्मद शोरोन ने 23 मई को रबेया एग्रो फार्म से 3.85 लाख टका (लगभग 3 लाख भारतीय रुपए) में खरीदा था। जब इस अनोखे जानवर की लोकप्रियता(Popularity) सोशल मीडिया पर चरम पर पहुंच गई, तो बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने मामले का संज्ञान लिया। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद के निर्देश पर इसकी कुर्बानी रोक दी गई है और अधिकारियों को खरीदार की पूरी रकम वापस करने के आदेश दिए गए हैं।
Trump Buffalo:सुनहरे बालों और ‘ट्रम्प’ जैसी हेयरस्टाइल ने बनाया सोशल मीडिया स्टार
इस 4 साल के भैंसे के चर्चा में आने की सबसे बड़ी वजह इसका हुलिया है। इस भैंसे के सिर पर मौजूद सुनहरे बालों का गुच्छा हूबहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सिग्नेचर हेयरस्टाइल से मेल खाता है। इसी वजह से इंटरनेट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के बीच इसका नाम ‘ट्रम्प भैंसा’ पड़ गया। इसे देखने के लिए फार्म पर लोगों और ब्लॉगर्स की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। इसकी इसी लोकप्रियता और अनोखेपन को देखते हुए सरकार ने इसे बचाने का फैसला किया ताकि इसे एक राष्ट्रीय धरोहर के रूप में संरक्षित किया जा सके।
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बांग्लादेश में दुर्लभ है यह नस्ल, अब नेशनल जू बनेगा नया आशियाना
कुर्बानी से बचाए जाने के बाद इस अनोखे भैंसे को ढाका स्थित ‘बांग्लादेश नेशनल जू’ (राष्ट्रीय चिड़ियाघर) भेज दिया गया है, जहां सरकार खुद इसकी देखभाल करेगी। चिड़ियाघर के क्यूरेटर अतीकुर रहमान ने बताया कि इसे फिलहाल दो हफ्ते के लिए क्वारंटीन और विशेष निगरानी में रखा गया है, जिसके बाद इसे आम जनता के देखने के लिए नए बाड़े में शिफ्ट किया जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह भैंसा ‘एल्बिनो’ नस्ल का है जो बांग्लादेश में बेहद दुर्लभ मानी जाती है। मेलेनिन पिगमेंट की कमी के कारण इनका रंग सफेद या हल्का गुलाबी होता है और हजारों में से किसी एक जानवर में ही ऐसा आनुवंशिक बदलाव देखने को मिलता है।
‘एल्बिनो’ नस्ल के जानवर सामान्य जानवरों से किस तरह अलग होते हैं और इन्हें किन स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा ज्यादा रहता है?
एल्बिनो नस्ल के जानवरों के शरीर में ‘मेलेनिन’ (Melanin) नाम का पिगमेंट या तो बनता ही नहीं है या बेहद कम मात्रा में बनता है। यही वह पिगमेंट है जो जानवरों की त्वचा, बाल और आंखों को उनका स्वाभाविक रंग (जैसे काला या भूरा) देता है। इसकी कमी के कारण एल्बिनो जानवरों की त्वचा और बाल पूरी तरह सफेद या हल्के गुलाबी दिखाई देते हैं। मेलेनिन न होने के कारण इन जानवरों की त्वचा और आंखें अत्यधिक संवेदनशील होती हैं, जिसके चलते इन्हें तेज धूप, सनबर्न, त्वचा के संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा सामान्य जानवरों की तुलना में काफी ज्यादा होता है।