वॉशिंगटन । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल को एक साल पूरा हो गया है। यह एक साल अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए काफी हलचल भरा रहा। 20 जनवरी 2025 को सत्ता में आने के बाद ट्रंप ने “अमेरिका फर्स्ट” (America First) नीति को तेजी और सख्ती से लागू किया। इससे उनके समर्थकों को कुछ तात्कालिक फायदे जरूर दिखे, लेकिन अमेरिका की वैश्विक पकड़ कमजोर हुई और दुनिया में बहुध्रुवीय व्यवस्था यानी कई शक्तिशाली देशों के उभरने की प्रक्रिया तेज हो गई।
एक साल में 225 से ज्यादा कार्यकारी आदेश
देश के अंदर ट्रंप सरकार (Trump Government) ने पहले ही साल में 225 से ज्यादा कार्यकारी आदेश जारी किए। इमिग्रेशन उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही। एक साल में करीब 6 लाख लोगों को अमेरिका से बाहर निकाला गया। सीमा सुरक्षा के नाम पर कई शहरों में नेशनल गार्ड तैनात किए गए। समर्थकों ने इन कदमों को सख्त और जरूरी बताया, लेकिन परिवारों के अलग होने, गलत गिरफ्तारी और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से सरकार की कड़ी आलोचना हुई। लॉस एंजिलिस, मिनियापोलिस और अन्य शहरों में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए।
टैक्स कटौती और महंगाई: संतुलन बिगड़ा
आर्थिक मोर्चे पर टैक्स में कटौती, ऊंचे टैरिफ और सरकारी खर्च घटाने से कुछ इलाकों में उद्योगों को बढ़ावा मिला, लेकिन इसके साथ ही महंगाई भी बढ़ी। मध्यम वर्ग और गरीब तबके पर इसका सीधा असर पड़ा। सरकारी विभागों में छंटनी और लगातार नीतिगत बदलावों से प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर हुई।
विदेश नीति: एकतरफा रुख और सहयोगियों की नाराजगी
विदेश नीति में ट्रंप ने एकतरफा रुख अपनाया। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों से दूरी बनाई, सहयोगी देशों पर टैरिफ की धमकी दी और सैन्य कार्रवाइयां कीं। इससे अमेरिका के पुराने सहयोगी नाराज हुए। दूसरी ओर चीन, रूस और ब्रिक्स देशों की भूमिका मजबूत होती चली गई, जिससे वैश्विक संतुलन बदलने लगा।
देश में विरोध और ‘मागा’ आधार की कमजोरी
ट्रंप की नीतियों के खिलाफ देश के भीतर बड़े जन आंदोलन खड़े हुए। लाखों लोग सड़कों पर उतरे और सामाजिक संगठनों ने सरकार को खुली चुनौती दी। साथ ही एप्सटीन से जुड़े खुलासों और आर्थिक दबाव के कारण ट्रंप का ‘मागा’ समर्थक आधार भी कमजोर पड़ता नजर आया।
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निष्कर्ष: विवादों से भरा पहला साल
कुल मिलाकर, ट्रंप का दूसरा कार्यकाल का पहला साल विवादों और विरोध से भरा रहा। विशेषज्ञ मानते हैं कि उनकी नीतियों ने अनजाने में ही अमेरिका में लोकतांत्रिक जागरूकता और दुनिया में शक्ति संतुलन की नई दिशा तैयार कर दी है।
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