8 साल बाद बीजिंग में ऐतिहासिक मुलाकात
बीजिंग: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने चीन का दौरा(Trump) कर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में मुलाकात की। यह आठ वर्षों में किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली बीजिंग यात्रा है। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने “नई रणनीतिक साझेदारी” (New Strategic Partnership) की घोषणा की। कार्नी ने जोर देकर कहा कि “बदलती वैश्विक हकीकत” के बीच कनाडा और चीन को अपने पुराने कड़वे रिश्तों को भुलाकर व्यापार, ऊर्जा और वित्त क्षेत्र में ऐतिहासिक सहयोग करना चाहिए।
ट्रेड डील: अमेरिका पर निर्भरता कम करने की चाल
प्रधानमंत्री कार्नी ने शुक्रवार (16 जनवरी 2026) को एक अहम व्यापार समझौते की घोषणा की। इस समझौते के तहत:
इलेक्ट्रिक वाहन (EV): कनाडा अब चीन से 49,000 इलेक्ट्रिक वाहनों का आयात रियायती टैरिफ (6.1%) पर करेगा। यह उन 100% टैरिफ को हटाने जैसा है जो पिछले कार्यकाल में लगाए गए थे।
कृषि उत्पाद: चीन कनाडाई कनोला (Canola) बीजों पर टैरिफ(Trump) को 84% से घटाकर 15% करने पर सहमत हो गया है। इसके अलावा झींगा और मटर जैसे उत्पादों के लिए भी बाजार फिर से खुल गया है।
वीजा फ्री एंट्री: राष्ट्रपति शी ने कनाडाई नागरिकों के लिए चीन में वीजा-मुक्त प्रवेश (Visa-free access) देने की प्रतिबद्धता जताई है।
अन्य पढ़े: नीदरलैंड से नागपुर तक: अपनी ‘कुंती’ को ढूंढने निकला एक आधुनिक ‘कर्ण’
‘डॉनरो डॉक्ट्रिन’ और ट्रंप की धमकियों का असर
कनाडा का चीन की ओर झुकाव सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की प्रतिक्रिया है। ट्रंप(Trump) ने कनाडा पर 25% तक टैरिफ लगाने की धमकी दी थी और यहाँ तक कह दिया था कि कनाडा अमेरिका का ’51वां राज्य’ बन सकता है। इसे ‘डॉनरो डॉक्ट्रिन’ (Donroe Doctrine) कहा जा रहा है, जिसमें ट्रंप पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी संप्रभुता को सर्वोपरि मानते हैं। कार्नी का लक्ष्य 2035 तक कनाडा के गैर-अमेरिकी निर्यात को दोगुना करना है ताकि अमेरिकी दबाव को कम किया जा सके।
मार्क कार्नी ने चीन के साथ ‘कृषि और ऊर्जा’ पर ही सबसे ज्यादा जोर क्यों दिया?
कनाडा के लिए चीन कृषि उत्पादों, विशेष रूप से कनोला बीज का $4 बिलियन का बाजार है। चीन द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ से कनाडाई किसानों को भारी नुकसान(Trump) हो रहा था। दूसरी ओर, चीन क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी (सौर और बैटरी) में दुनिया का नेतृत्व करता है। कार्नी का मानना है कि इन क्षेत्रों में सहयोग से कनाडा को अमेरिकी टैरिफ से होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलेगी।
क्या कनाडा और चीन के बीच पुराने विवाद सुलझ गए हैं?
कार्नी की यात्रा रिश्तों को ‘रीसेट’ करने की कोशिश है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। 2018 में हुआवेई अधिकारी की गिरफ्तारी और चीन में दो कनाडाई नागरिकों को हिरासत में लेने के घाव अभी भी गहरे हैं। हालांकि, ट्रंप के बढ़ते टैरिफ और आर्थिक दबाव ने दोनों देशों को आपसी मतभेदों को दरकिनार कर अपनी ‘आर्थिक उत्तरजीविता’ के लिए एक साथ आने पर मजबूर कर दिया है।
अन्य पढ़े: