Trump tariffs impact : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” आर्थिक नीतियां वैश्विक व्यापार व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। अन्य देशों से आयातित वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाने से पिछले एक वर्ष में अमेरिकी खजाने को लगभग 287 अरब डॉलर (करीब ₹26 लाख करोड़) का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है। अप्रैल 2024 से भारत सहित कई देशों पर औसतन 17 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ाए जाने के बाद कर राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि 1932 के बाद यह अमेरिका की सबसे कठोर शुल्क नीतियों में से एक है।
इन टैरिफ का मुख्य उद्देश्य व्यापार घाटा कम करना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना था। हालांकि व्यापार घाटा घटकर कई वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है, लेकिन घरेलू उद्योग अपेक्षित गति से मजबूत नहीं हो पाए हैं। सरकार को उम्मीद थी कि स्थानीय उद्योगों के विस्तार से रोजगार बढ़ेगा, लेकिन वास्तविक स्थिति मिश्रित रही है। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल उद्योग पर इन शुल्कों का दबाव देखा जा रहा है।
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दूसरी ओर आयातित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का बोझ आम (Trump tariffs impact) उपभोक्ताओं पर पड़ा है। आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने से खुदरा महंगाई पर दबाव बढ़ा है। हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार आधे से अधिक अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि इन शुल्कों के कारण उनके जीवनयापन की लागत बढ़ गई है।
इसी बीच ट्रंप प्रशासन के कुछ व्यापारिक निर्णयों पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा आपत्ति जताए जाने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में नई बहस शुरू हो गई है। इन नीतियों का दीर्घकालिक प्रभाव अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या होगा, इस पर वैश्विक स्तर पर नजरें टिकी हुई हैं।
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