पिछली मुलाकात में हुई थी तीखी बहस
फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली के नेता भी रहेंगे मौजूद
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प(Trump) और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की(Volodymyr Zelensky) के बीच आज व्हाइट हाउस में महत्वपूर्ण मुलाकात होने जा रही है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के तरीकों पर चर्चा करना है।
इस बातचीत में जेलेंस्की के साथ यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन, नाटो महासचिव मार्क रूटे और ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस तथा इटली के प्रधानमंत्रियों सहित कई यूरोपीय नेता भी शामिल होंगे।
यह सात महीनों में ट्रम्प(Trump) और जेलेंस्की की तीसरी मुलाकात होगी, हालांकि पिछली मुलाकातें तीखी बहस के साथ समाप्त हुई थीं। इस बार यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी से यह उम्मीद की जा रही है कि बातचीत अधिक रचनात्मक होगी।
पिछली तीखी बहस और रूस-पुतिन की मुलाकात
पिछली बार जब ट्रम्प(Trump) और जेलेंस्की मिले थे, तो उनके बीच अमेरिकी मदद को लेकर जोरदार बहस हुई थी। ट्रम्प ने जेलेंस्की पर अमेरिकी मदद के प्रति कृतज्ञ न होने का आरोप लगाया था, जिसके कारण दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण मिनरल डील नहीं हो पाई थी।
वहीं, ट्रम्प ने हाल ही में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात की थी, जो तीन घंटे तक चली, लेकिन बेनतीजा रही। ट्रम्प पहले भी कह चुके हैं कि युद्ध रोकने के लिए यूक्रेन(Ukraine) को रूस से जमीन की अदला-बदली करनी पड़ सकती है, जिस पर आज की बैठक में भी चर्चा होने की संभावना है।
जेलेंस्की के तीन मुख्य मुद्दे और पुतिन की शर्तें
इस बैठक में जेलेंस्की का मुख्य ध्यान तीन मुद्दों पर रहेगा: यूक्रेन में नागरिकों की हत्याएं बंद करना, रूस पर और अधिक प्रतिबंध लगाना और स्थायी सीजफायर के बाद ही सुरक्षा गारंटी पर बात करना। वह यूक्रेन, अमेरिका और रूस के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक का भी समर्थन करते हैं।
दूसरी ओर, पुतिन ने यूक्रेन के 20% हिस्से पर कब्जा छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें क्रीमिया, डोनेट्स्क और लुहांस्क जैसे रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं। पुतिन का कहना है कि यूक्रेन को इन कब्जाए गए क्षेत्रों पर अपना दावा छोड़ना होगा तभी शांति वार्ता संभव है।
जमीन की अदला-बदली पर विवाद और यूरोपीय देशों का रुख

ट्रम्प(Trump) द्वारा प्रस्तावित जमीन की अदला-बदली का मुद्दा रूस और यूक्रेन के बीच विवाद का मुख्य कारण है। पुतिन ने डोनेट्स्क के बदले खेरसॉन और जापोरिज्जिया में अपने मोर्चे को स्थिर करने का प्रस्ताव दिया है, जिसे रूस अपनी ऐतिहासिक धरोहर मानता है।
हालांकि, जेलेंस्की यूक्रेन की एक इंच भी जमीन देने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ऐसा करने से देश की संप्रभुता और सुरक्षा कमजोर होगी। दूसरी तरफ, यूरोपीय देश, विशेषकर जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस, यूक्रेन के आत्मसमर्पण के पक्ष में नहीं हैं। वे यूक्रेन को बिना सुरक्षा गारंटी दिए कोई भी समझौता करने के खिलाफ हैं। इस मतभेद के कारण शांति वार्ता में सहमति बनना मुश्किल हो रहा है।
इसके अलावा, पुतिन की एक अहम शर्त यह भी है कि यूक्रेन नाटो में शामिल होने की अपनी मंशा छोड़ दे, जिसे वह रूस के लिए खतरा मानते हैं।
ट्रम्प(Trump) और ज़ेलेंस्की के बीच इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा क्या है?
इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के तरीकों पर चर्चा करना है।
पिछली बार जब ट्रम्प(Trump) और ज़ेलेंस्की मिले थे, तो उनके बीच किस बात पर तीखी बहस हुई थी?
पिछली बार उनकी बहस अमेरिकी मदद को लेकर हुई थी। ट्रम्प ने ज़ेलेंस्की से कहा था कि वे अमेरिकी मदद को लेकर शुक्रगुजार नहीं हैं, जिसके कारण दोनों देशों के बीच एक मिनरल डील नहीं हो पाई थी।
इस बैठक में कौन-कौन से यूरोपीय नेता शामिल हो रहे हैं और क्यों?
इस बैठक में यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वान डेर लेयेन, नाटो महासचिव मार्क रूटे, ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और इटली की PM जॉर्जिया मेलोनी शामिल हो रहे हैं। माना जा रहा है कि उनकी मौजूदगी का कारण पिछली बार जैसी तीखी बहस से बचना और एक सार्थक बातचीत को सुनिश्चित करना है।
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