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PAK- अफगानिस्तान में छूटे अमेरिकी हथियारों से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: March 2, 2026 • 10:32 AM
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इस्लमाबाद । अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के दौरान छोड़े गए हथियार अब पाकिस्तान के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बन गए हैं। दरअसल पाकिस्तान द्वारा की गई एयर स्ट्राइक (Air Strike) के जवाब में तालिबान ने जिस मुस्तैदी और सटीक हमला किया है, उसके बाद कयास लगाए जाने लगे हैं कि अमेरिका के छोड़े गए उन्हीं आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ किया गया है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा बढ़ गया है।

अमेरिका से हथियार वापस लेने की मांग

पाकिस्तान ने पहले ही अमेरिका से आग्रह किया था कि अफगानिस्तान (Afganistan) में छोड़े गए हथियार वापस लिए जाएं। तब पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने कहा था कि अमेरिकी हथियारों का अनियंत्रित प्रसार पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए सीधे खतरे का संकेत है। खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन के अनुमान के मुताबिक अफगानिस्तान में छोड़े गए हथियारों की कुल कीमत सात अरब डॉलर से अधिक है। इनमें बख्तरबंद वाहन, उन्नत आग्नेयास्त्र, बायोमीट्रिक सिस्टम और अन्य संवेदनशील सैन्य उपकरण शामिल हैं।

तालिबान के कब्जे में आधुनिक हथियार

विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से कई हथियार तालिबान ने जब्त कर लिए और अब वे पाकिस्तान सेना के खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे हैं। अफगानिस्तान के खोस्त और पक्तिका जैसे इलाकों में अमेरिकी हथियार ब्लैक मार्केट में बेचे जाने की भी बात मीडिया रिपोर्ट में आई थी, लेकिन जिस तरह से तालिबानी बलों ने पाकिस्तान की सेना को टक्कर दी है, उससे यही कयास लगाए जा रहे हैं कि इन हथियारों का इस्तेमाल हो रहा है।

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ब्लैक मार्केट में ऊंची कीमत

ब्लैक मार्केट कीमतों के अनुसार, एक एम4 राइफल की कीमत 4,200 डॉलर से अधिक है, जबकि एम16 राइफल 1,400 डॉलर में बिकती है। चीनी राइफलें सस्ती उपलब्ध हैं, लेकिन अफगानी लड़ाके अमेरिकी हथियारों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को अधिक पसंद करते हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि नाटो द्वारा आपूर्ति किए गए लगभग 4,00,000 हथियार तालिबान के नियंत्रण में हो सकते हैं। सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, यही हथियार अब पाकिस्तान के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रहे हैं।

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