मॉस्को । रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी एक प्रतीकात्मक और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की क्रेमलिन स्थित निजी लाइब्रेरी में जर्मन लेपर्ड-2 टैंक का एक टुकड़ा सहेज कर रखा गया है। यह वही टैंक है, जिसे जर्मनी ने यूक्रेन को रूस के खिलाफ लड़ाई के लिए दिया था।
पुतिन की लाइब्रेरी में क्यों रखा गया टैंक का टुकड़ा
रिपोर्ट के अनुसार, यह टुकड़ा यूक्रेन में स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन (Special Milliatary Operation) के दौरान नष्ट किए गए लेपर्ड-2 टैंक का है। इस टुकड़े पर लिखा है—सर्वोच्च कमांडर-इन-चीफ के लिए, स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन के क्षेत्र में हमारे द्वारा नष्ट किए गए एक फासीवादी लेपर्ड टैंक (Leopard Tank) का एक टुकड़ा।” यह फुटेज हाल ही में क्रेमलिन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को जन्म दे दिया।
रूसी सेना ने लेपर्ड-2 टैंकों को बनाया निशाना
बताया जा रहा है कि युद्ध के दौरान रूसी सेना (Russia Army) ने जर्मन लेपर्ड-2 टैंकों को भारी नुकसान पहुंचाया। कुछ टैंकों को रूस ने कब्जे में भी लिया, ताकि उनकी तकनीक का अध्ययन किया जा सके। लेपर्ड-2 को दुनिया के सबसे शक्तिशाली मुख्य युद्धक टैंकों में गिना जाता है।
यूक्रेन को जर्मनी ने दिए थे 14 लेपर्ड-2 टैंक
जर्मनी ने यूक्रेन को कुल 14 लेपर्ड-2 टैंक दिए थे। ये टैंक बिना किसी आर्थिक सौदे के सौंपे गए थे, हालांकि ये नए नहीं बल्कि पुराने बैच के टैंक थे, जिनका पहले अन्य देशों की सेनाएं इस्तेमाल कर चुकी थीं।
यूक्रेन ने इन्हें पूर्वी मोर्चे पर रूसी सेना के खिलाफ उतारा, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
ट्रेनिंग की कमी बनी बड़ी कमजोरी
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेनी सैनिकों को लेपर्ड-2 जैसे उन्नत टैंकों को ऑपरेट करने के लिए पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं मिल पाई। इसी वजह से ये टैंक रूसी सेना का आसान निशाना बन गए।
लेपर्ड-2 टैंक की ताकत और खासियत
लेपर्ड-2 की स्थिरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि इसकी 120 एमएम मेन गन के सिरे पर रखा बीयर का गिलास चलते समय भी नहीं छलकता। यह टैंक 72 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है, हालांकि पहाड़ी और दलदली इलाकों में इसकी गति कम हो जाती है।
हथियार और तकनीकी क्षमता
लेपर्ड-2 में 120 एमएम की एल-55 मेन गन लगी है और यह एक बार में 42 राउंड गोला-बारूद ले जा सकता है। इसके अलावा, इसमें 7.62 एमएम की मशीनगन और एक एंटी-एयरक्राफ्ट मशीनगन भी मौजूद है।
एक बार रिफ्यूल करने पर यह टैंक 370 से 547 किलोमीटर तक ऑपरेट किया जा सकता है।
1985 से 1992 के बीच हुआ था निर्माण
लेपर्ड-2 टैंक का निर्माण जर्मनी ने 1985 से 1992 के बीच अलग-अलग बैच में किया था। आज भी इसे दुनिया के सबसे भरोसेमंद और घातक मुख्य युद्धक टैंकों में गिना जाता है।
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