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West Asia Doctrine: भारत की नई ‘पश्चिम एशिया डॉक्ट्रिन’

Dhanarekha
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West Asia Doctrine: भारत की नई ‘पश्चिम एशिया डॉक्ट्रिन’

रणनीतिक चुप्पी और मजबूत गठबंधन

दुबई: ईरान-इजराइल युद्ध और अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु जैसी बड़ी घटनाओं पर भारत(West Asia Doctrine) की ‘रणनीतिक चुप्पी’ एक सोची-समझी नीति का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा UAE के राष्ट्रपति को ‘भाई’ कहना और उन पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करना यह दर्शाता है कि भारत अब पश्चिम एशिया में अपने असली सहयोगियों की पहचान कर चुका है। पिछले 12 वर्षों में विकसित हुई यह नीति अब स्पष्ट रूप से ‘समान विचारधारा’ वाले देशों के साथ खड़े होने और क्षेत्रीय सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने की ओर इशारा करती है

हिंद महासागर क्षेत्र में ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’

भारत का नया सिद्धांत यह है कि वह अपनी बढ़ती आर्थिक और सैन्य शक्ति का उपयोग हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा प्रदान करने के लिए करेगा। अब तक मिडिल ईस्ट की शांति का जिम्मा केवल अमेरिका पर माना जाता था, लेकिन भारत अब अपने सहयोगियों(West Asia Doctrine) की सहमति से एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ के रूप में उभर रहा है। भारत का लक्ष्य केवल तेल की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह खुद को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था(Economy) के रूप में स्थापित कर पश्चिम एशिया के देशों के लिए हाइड्रोकार्बन (तेल) से इतर एक बड़ा व्यापारिक साझेदार बनना चाहता है।

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चीन की चिंता और क्षेत्रीय खींचतान

भारत की इस नई डॉक्ट्रिन से चीन की बेचैनी बढ़ना तय है। चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों और आयात-निर्यात के लिए पूरी तरह से हिंद महासागर मार्ग पर निर्भर है। भारत का इस क्षेत्र में बढ़ता दबदबा और नए सैन्य गठबंधन चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ नीति(West Asia Doctrine) के लिए बड़ी चुनौती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस भारतीय प्रभाव को कम करने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल कर सकता है। आने वाले समय में पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र भारत, चीन और अमेरिका के बीच एक बड़ा रणनीतिक अखाड़ा बन सकता है।

भारत की ‘नई विदेश नीति डॉक्ट्रिन’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य भारत को हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider) के रूप में स्थापित करना है। इसके तहत भारत अपने विश्वसनीय सहयोगियों (जैसे UAE) के साथ मिलकर आर्थिक और सैन्य हितों की रक्षा करेगा, जिससे क्षेत्र में केवल अमेरिका या चीन का ही वर्चस्व न रहे।

चीन भारत की इस नई नीति को क्यों विफल करना चाहता है?

चीन का अधिकांश वैश्विक व्यापार हिंद महासागर से होकर गुजरता है। यदि भारत इस क्षेत्र में मजबूत गठबंधन बनाता है, तो युद्ध या तनाव की स्थिति में चीन की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। इसलिए चीन भारत के प्रभाव को रोकने के लिए पाकिस्तान जैसे देशों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश करता है।

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