नई दिल्ली । सदियों से सुबह उठकर गुनगुना पानी (lukewarm water) पीने की परंपरा चली आ रही है,जिसे आयुर्वेद में बेहद फायदेमंद माना गया है। यह सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि शरीर को संतुलित और सक्रिय रखने की प्रक्रिया है।
आयुर्वेद में गुनगुने पानी का महत्व
आयुर्वेद के अनुसार सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से कई असाधारण फायदे मिलते हैं। यह पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त करता है और कफ दोष को संतुलित रखने में मदद करता है। नियमित सेवन (Regular Intake) से शरीर भीतर से शुद्ध और सक्रिय बना रहता है।
पाचन शक्ति को करता है मजबूत
सुबह उठते ही गुनगुने पानी का सेवन करने से शरीर की मंद पड़ी पाचन अग्नि सक्रिय हो जाती है। इससे भोजन पचाने की क्षमता बढ़ती है और पेट से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।
शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक
हल्का गर्म पानी आंतों को गतिशील बनाता है, जिससे शरीर में जमा विषैले पदार्थ धीरे-धीरे बाहर निकलने लगते हैं। यह कफ (Cough) को ढीला कर छाती से बाहर निकालने में भी मददगार माना जाता है।
वजन घटाने में भी फायदेमंद
जिन लोगों का वजन बढ़ने लगा है, उनके लिए गुनगुना पानी उपयोगी माना जाता है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और चर्बी कम करने की प्रक्रिया को गति देता है।
दिन में कब और कैसे पिएं
विशेषज्ञों के अनुसार गुनगुना पानी सिर्फ सुबह ही नहीं, बल्कि दिन में कई बार पिया जा सकता है। सुबह के बाद भोजन करने से लगभग आधा घंटा पहले इसका सेवन करना पाचन शक्ति को और मजबूत करता है तथा वजन नियंत्रित रखने में सहायक होता है। वहीं, भोजन के करीब एक घंटे बाद गुनगुना पानी पीना भी लाभकारी माना जाता है।
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इन बातों का रखें ध्यान
हालांकि गुनगुना पानी हर स्थिति में फायदेमंद नहीं होता। जब प्यास बहुत तेज लगी हो या शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति हो, तब इसका सेवन करने से बचना चाहिए। अत्यधिक गर्मी के मौसम में भी गुनगुना या गर्म पानी घबराहट और असहजता पैदा कर सकता है। गर्मियों में जिन लोगों को पित्त की समस्या, पेट में जलन या एसिडिटी रहती है, उन्हें गुनगुना पानी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए या डॉक्टर की सलाह से सेवन करना चाहिए।
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