नई दिल्ली। जितना ज्यादा फोन, टीवी और डिजिटल स्क्रीन (Digital Screen) का इस्तेमाल बढ़ रहा है आंखों की समस्याएं भी उतनी ही बढ़ रही हैं। खासतौर पर ड्राई आई की समस्या मुसीबत बन गई है। आंखों में जलन, खुजली, धुंधलापन और नमी की कमी को दूर करने के लिए अक्सर आई ड्रॉप्स का ही इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अब ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के आरपी सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक साइंसेज ने एक ऐसी गोली पर ट्रायल किया है जो न केवल आंखों को उनकी नमी लौटाएगी बल्कि ड्राई आंखों (Dry Eye) की समस्या का स्थाई समाधान भी होगी।
मां के दूध से बनी टैबलेट पर सफल ट्रायल
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आरपी सेंटर नई दिल्ली ने यह टेबलेट मां के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन (Protein) से तैयार की है और ट्रायल्स में इसके शानदार नतीजे सामने आए हैं। लैक्टोफेरिन नाम की यह टेबलेट ड्राई आंखों के इलाज में रामबाण बन सकती है। डॉक्टरों की मानें तो यह दवा जल्द ही बाजार में आ सकती है।
डिजिटल स्क्रीन बना ड्राई आई का बड़ा कारण
डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल या लेसिक लेजर सर्जरी के चलते मरीजों को अक्सर आंखों में जलन, चुभन और सूखापन यानी ड्राई आई सिंड्रोम की दिक्कत होती है। खासतौर पर स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल के चलते आज की तारीख में यह आंखों की सबसे कॉमन बीमारी बन चुकी है। जो बड़ों से लेकर बच्चों तक में आम हो गई है। आरपी सेंटर की नेत्र रोग विशेषज्ञ ने बताया कि डिजिटल युग में बढ़ते स्क्रीन टाइम ने ड्राई आई सिंड्रोम को तेजी से बढ़ाया है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की मैबोमियन ग्लैंड प्रभावित होती है, जिससे आंसू बनने और उनकी गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है।
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जड़ से समस्या खत्म करने का दावा
इस ट्रायल की खास बात यह है कि ‘लैक्टोफेरिन’ दवा केवल लक्षणों को दबाने के बजाय समस्या की जड़ पर काम करती है और आंखों के पूरे सिस्टम को संतुलित करती है। डॉक्टर के मुताबिक लैक्टोफेरिन कोई कृत्रिम रसायन नहीं, बल्कि शरीर में पाया जाने वाला प्राकृतिक प्रोटीन है, जो खासतौर पर मां के दूध में मौजूद होता है और इम्युनिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि इसे आंखों के लिए एक प्रभावी नेचुरल हीलिंग विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इस दवा को जापान में तैयार करवाया गया है और आरपी सेंटर ने इसको परखा है, जिसमें यह सफल हुए हैं।
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