नई दिल्ली । आज के डिजिटल दौर में लगातार कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन (Mobile Screen) पर नजरें टिकाए रखना आम बात हो गई है, लेकिन यह आदत धीरे-धीरे आंखों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। शुरुआत में हल्की जलन या थकान के रूप में दिखने वाली समस्या समय के साथ बड़ी परेशानी का रूप ले सकती है।
स्क्रीन टाइम से आंखों पर बढ़ रहा दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से पलक झपकाने की दर कम हो जाती है। जहां सामान्य तौर पर व्यक्ति एक मिनट में 15 से 20 बार पलक झपकाता है, वहीं स्क्रीन पर काम करते समय यह घटकर करीब 5 बार रह जाती है। इससे आंखों की नमी कम होती है और सूखापन, जलन व खुजली जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।
खराब रोशनी और धूल भी बन रही वजह
सिर्फ स्क्रीन ही नहीं, बल्कि तेज रोशनी, गलत ब्राइटनेस (Wrong Brightness) और धूल भरा वातावरण भी आंखों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इससे कंजंक्टिवाइटिस और कॉर्निया से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों का कहना है कि आंखों से जुड़ी समस्याएं धीरे-धीरे विकसित होती हैं, इसलिए शुरुआती संकेतों को पहचानना जरूरी है। आंखों में लालिमा, जलन, सूखापन, धुंधला दिखना, सिरदर्द, तेज रोशनी से चुभन और फोकस करने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं। अगर इनमें से तीन या अधिक लक्षण लगातार बने रहें, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
20-20-20 नियम से मिलेगा आराम
इन समस्याओं से बचाव के लिए 20-20-20 नियम बेहद कारगर माना जाता है। इसके तहत हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखना चाहिए। इससे आंखों को आराम मिलता है और तनाव कम होता है।
डाइट और आदतों में बदलाव जरूरी
आंखों को स्वस्थ रखने के लिए काम करते समय बार-बार पलक झपकाना, स्क्रीन से उचित दूरी बनाए रखना और सही ऊंचाई पर काम करना जरूरी है। इसके साथ ही संतुलित आहार भी अहम भूमिका निभाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन A, C और E से भरपूर हरी सब्जियां, फल और ड्राई फ्रूट्स (Dry Fruits) आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
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नियमित जांच से बचाव संभव
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए। कई बार समस्याएं बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी विकसित हो जाती हैं, जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।
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