एक व्यापारी परिवार के लिए वो कुछ मिनट किसी बुरे सपने से कम नहीं थे। अचानक हुई लूट की वारदात ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
- घटना के दौरान परिवार का बेटा बेहद समझदारी से पेश आया
- उसने तुरंत कार स्टार्ट कर मौके से निकाल ली
- उसकी तेज़ प्रतिक्रिया ने परिवार की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई
लूट की वारदात ने मचाई अफरा-तफरी
- बदमाशों ने अचानक हमला कर लूटपाट की
- परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला
- कुछ ही मिनटों में पूरा माहौल डर और अफरा-तफरी से भर गया
इंदौर के ऑटोपार्ट्स व्यापारी परिवार के साथ त्र्यंबकेश्वर से लौटते वक्त धामनोद के पास लूट की वारदात हो गई थी। ये घटना 15 तारीख की रात को 11.50 बजे हुई। खलघाट का (Toll Plaza) टोल नाका क्रॉस करने के बाद कार में अचानक दिक्कत आई तो व्यापारी के बेटे ने टोल नाका से करीब 500 मीटर दूर गाड़ी रोकी। बेटा कार को बंद-चालू करके देख ही रहा था कि अचानक 5 से 6 नकाबपोश हथियारबंद बदमाश आ गए और कार के कांच फोड़कर लूट की वारदात को अंजाम दिया।
बदमाशों ने व्यापारी की पत्नी के गले से सोने की चेन झपट ली। तभी व्यापारी के बेटे ने कार चालू की और वहां से भाग कर अपने आप को बचाया, जिसके बाद वे धामनोद फाटक से कुछ किमी दूर एक पेट्रोल पंप पर रुके और पुलिस को जानकारी दी।
इंदौर के (Indore) स्कीम नंबर 71 में मनोज गुप्ता (55) अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनकी ऑटो पार्ट्स की शॉप है। परिवार में पत्नी संगीता गुप्ता (54), बेटी आशी और बेटे अर्थव (25) के साथ रहते हैं। संगीता गुप्ता सोशल वर्कर हैं और कई संस्थाओं से जुड़ी हुई हैं। 11 मार्च को मनोज गुप्ता का जन्मदिन था, इसलिए परिवार ने बाहर जाने का प्लान बनाया। आसपास के ज्योतिर्लिंग घूम लिए थे, इसलिए इस बार त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने का प्लान तय हुआ।
आंखों देखी सुनाई परिवार की जुबानी
13 मार्च को परिवार इंदौर से अपनी कार में सवार होकर भगवान के दर्शन करने के लिए जाने के लिए निकला। शनिवार सुबह 6 बजे वे त्र्यंबकेश्वर पहुंचे। यहां अन्नपूर्णा आश्रम में रुके। दोपहर 2 बजे नासिक को निकले। वहां पहुंचकर देव दर्शन किए। गोदावरी आरती में शामिल हुए। रात को 8 बजे वापस त्र्यंबकेश्वर लौट आए। यहां आश्रम में रुके और रविवार की अलसुबह 4 बजे त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिए लाइन में लग गए। सुबह करीब 9 बजे दर्शन किए। यहां से एक गुरुजी के दर्शन कर वापस आश्रम लौट आए। परिवार शाम 4 बजे वापस इंदौर आने के लिए निकल गए।
खलघाट टोल नाके के बाद अचानक हो गया हमला
संगीता गुप्ता ने बताया कि हंसी खुशी हमारी यात्रा चल रही थी, हमें अंदाजा भी नहीं था कि आगे हमारे साथ क्या होने वाला है। इंदौर लौटते-लौटते रात करीब 11.45 बजे के बाद हमने खलघाट का टोलटैक्स पार किया। तभी अचानक कार में दिक्कत आने लगी। इस पर बेटे अर्थव ने टोल से करीब 500 मीटर दूर कार को रोड किनारे रोका। पास में ही खेत था, 11.50 का समय हो रहा था। बेटा कार को बंद-चालू करके देख ही रहा था तभी अचानक 5 से 6 नकाबपोश हथियारबंद बदमाश हमारी गाड़ी के पास आकर खड़े हो गए। उन्हें देख मैं घबरा गई। उनके हाथ में चाकू, फलिया और भी हथियार थे।
हथियार से उन्होंने मेरे साइड के गेट का कांच तोड़ दिया
सबसे पहले उन्होंने को-पैसेंजर साइड के पीछे वाली सीट के कांच तोड़ने लगे, जहां मैं बैठी थी। मेरे साइड का गेट लॉक था। बेटी मेरे पास ही सो रही थी, अवाज सुन वह उठी तो वह घबरा गई उसकी आवाज ही नहीं निकल रही थी। हथियार से उन्होंने मेरे साइड के गेट का कांच तोड़ दिया और मेरा गला पकड़ लिया और गले से सोने की चेन (करीब सवा तोला) और तुलसी माला झपट ली। उसके बाद उन्होंने पैसेंजर सीट पर बैठे पति के साइट के कांच को पत्थर से तोड़ दिया और गेट खोलने लगे, लेकिन उन्होंने गेट को पकड़कर रखा। इसके बाद वे ड्राइवर साइड पहुंचे जहां बेटा बैठा उसकी साइड का भी कांच फलिए से फोड़ दिया। उस वक्त लगा कि अब हम नहीं बचेंगे।
बेटे ने कार को चालू किया और वहां से कार भगा ली
मैं और मेरे पति जोर-जोर से चिल्ला रहे थे, रोड से गाड़ियां गुजर रही थीं, लेकिन कोई मदद को नहीं रुका, लेकिन तभी बेटे ने कार को चालू किया और वहां से कार भगा ली और आगे जाकर एक पेट्रोलपंप पर जाकर कार रोकी। कार में कांच ही कांच हो गए थे, मुझे, पति और बेटी को भी कांच के टुकड़े लग गए थे।
वहां पर लोगों ने हमारी मदद की। 10 मिनट वहां रुके और 112 पर कॉल कर घटना बताई। धामनोद में हमारे कई रिश्तेदार भी रहते है, उन्हें भी घटना के बारे में बताया, जिसके बाद वे भी हमारी मदद के लिए आ गए। पेट्रोपपंप से धामनोद पहुंचे और रास्ते में बाइक सवार दो पुलिसकर्मी मिले, उसने थाने का पता पूछा और थाने पर जाकर शिकायत की। बाद में मेरा और पिता का मेडिकल हुआ और FIR लिखवाई और वहां से सुबह करीब 4.30 बजे इंदौर आने के लिए निकले और सुबह इंदौर पहुंचे।
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दिनभर सहमें रहे, रात में बेटी हाथ पकड़कर सोई
यहां आने के बाद भी घटना बार-बार याद आ रही थी। सोमवार को पति और बेटी दोनों ही काम पर नहीं गए। थकान होने की वजह से आंखें बंद भी हो रही थी, तो बार-बार वहीं दृश्य नजर आ रहा था। खाने में भी मन नहीं लग रहा था। दिनभर मिलने-जुलने वाले भी आते रहे। हमारे साथ जो घटना हुई वह हर-हर कर याद आ रही थी।
हम पूरा दिन सदमें में थे, सोमवार का पूरा दिन हमारा बहुत बूरा निकला। अचानक से ही उन्होंने तोड़फोड़ शुरू कर दी थी। बहुत स्थिति खराब थी उस समय। रात में भी हम ठीक से सो नहीं पाए। बार-बार नींद खुल रही थी। बेटी अकेले उसके रूम में सोती है, लेकिन सोमवार की रात वह मेरे पास हाथ पकड़कर सोई। मुश्किल से हमारी रात गुजरी। मंगलवार को थोड़ा संभले है। पति भी शॉप पर गए, ओर बेटी को काम पर भेजा, ताकि वे सदमे से निकल सके।
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