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AI- एआई क्रांति से बढ़ेगी बिजली की मांग, भारत को अभी से तैयार रहना होगा : गौतम अदाणी

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: May 11, 2026 • 5:33 PM
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नई दिल्ली,। Gautam Adani ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी (Artificial Intelligence) आने वाले वर्षों में मोबाइल डेटा क्रांति जैसी बड़ी बदलावकारी लहर लेकर आएगा, जिससे ऊर्जा की खपत में भारी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि भारत को इस चुनौती और अवसर के लिए अभी से तैयार होना होगा।

मोबाइल डेटा क्रांति जैसा होगा एआई का प्रभाव

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अदाणी ने कहा कि जैसे एक दशक पहले स्मार्टफोन सस्ते होने, नेटवर्क विस्तार और डेटा दरों में कमी के कारण मोबाइल इंटरनेट (Mobile Internet) उपयोग में जबरदस्त उछाल आया था, उसी तरह एआई तकनीक भी तेजी से विस्तार करेगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई आधारित सिस्टम और डेटा प्रोसेसिंग में कहीं अधिक बिजली की आवश्यकता होगी, जिससे ऊर्जा मांग अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच सकती है।

डेटा सेंटर क्षमता में कई गुना वृद्धि की संभावना

गौतम अदाणी (Gautam Adani) ने चेतावनी दी कि भारत में डेटा सेंटर की क्षमता 2030 तक लगभग 5 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जबकि 2047 तक इसके 75 गीगावाट तक बढ़ने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मांग को पूरा करने के लिए ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अभी से बड़े स्तर पर निवेश और तैयारी जरूरी होगी।

भारत में मांग पहले से मौजूद है

अदाणी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यहां जो भी निर्माण किया जाएगा, उसकी मांग पहले से मौजूद है।उन्होंने कहा कि देश के बढ़ते शहर, आम परिवार, इलेक्ट्रिक वाहन, उद्योग और छोटे व्यवसाय लगातार ऊर्जा और संसाधनों की मांग बढ़ा रहे हैं। अब चुनौती इस मांग के अनुरूप क्षमता निर्माण की है।

ऊर्जा क्षमता 2047 तक 2000 गीगावाट पहुंचने का अनुमान

ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए अदाणी ने बताया कि मार्च 2026 तक देश की स्थापित ऊर्जा क्षमता 500 गीगावाट से अधिक हो चुकी है, जो पिछले 10 वर्षों में 53 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक इस क्षमता को चार गुना बढ़ाकर लगभग 2000 गीगावाट तक पहुंचाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही

अदाणी ने भारत की आर्थिक वृद्धि को भी ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि देश को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में 67 वर्ष लगे, लेकिन अगले 2 ट्रिलियन डॉलर केवल 12 वर्षों में जुड़ गए। उनके अनुसार भारत में सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे, कारखाने, ऊर्जा परियोजनाएं और डेटा सेंटर मिलकर विकास की नई गति तय कर रहे हैं।

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