National- पश्चिम एशिया संकट पर सरकार सतर्क, राजनाथ सिंह ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक

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राजनाथ सिंह
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नई दिल्ली,। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। इसी कड़ी में रक्षा मंत्री (Rajnath Singh) ने हालात की समीक्षा के लिए मंत्रियों के अनौपचारिक अधिकार प्राप्त समूह की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, भारत की रणनीतिक तैयारियों और आर्थिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, सरकार पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और कच्चे माल की उपलब्धता पर पड़ने वाले असर को लेकर लगातार निगरानी बनाए हुए है। खासतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और आयात लागत बढ़ने से कई उद्योगों पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों का उद्योगों पर असर

पश्चिम एशिया संकट का असर अब भारतीय उद्योगों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। एडहेसिव और निर्माण रसायन बनाने वाली कंपनी (Pidilite Industries) ने संकेत दिए हैं कि बढ़ती लागत के कारण उत्पादों की कीमतों में एक और बढ़ोतरी की जा सकती है। कंपनी के प्रबंध निदेशक Sudhanshu Vats ने बताया कि कच्चे तेल से जुड़े रॉ मटेरियल की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। उनके मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण भारित औसत आधार पर कच्चे माल की कीमतें 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।

फेविकोल और एम-सील जैसे उत्पाद हो सकते हैं महंगे

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Fevicol, Dr. Fixit, FeviKwik और M-Seal जैसे लोकप्रिय ब्रांडों की मालिक पिडिलाइट इंडस्ट्रीज अप्रैल और मई में पहले ही दो बार कीमतें बढ़ा चुकी है। अब कंपनी एक और दौर की मूल्य वृद्धि पर विचार कर रही है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही, तो आने वाले समय में निर्माण, पेंट, प्लास्टिक और केमिकल सेक्टर की लागत और बढ़ सकती है।

सरकार की नजर ऊर्जा और व्यापारिक आपूर्ति पर

सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के साथ समन्वय बना रही है। पश्चिम एशिया से भारत बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि तनाव लंबा खिंचता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है।

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वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया में जारी संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अस्थिरता बनी हुई है। निवेशकों और उद्योग जगत की चिंता इस बात को लेकर बढ़ रही है कि यदि हालात और बिगड़े तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसे में भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर त्वरित कदम उठाने की तैयारी में है।

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Anuj Kumar

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