प्लेन क्रैश में निधन की सूचना
खबरों के अनुसार, महाराष्ट्र के नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार का आज प्लेन क्रैश में निधन हो गया। वे 66 वर्ष के थे। इस खबर के बाद राजनीतिक गलियारों में शोक और सन्नाटा है।
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का प्लेन क्रैश (Plane crash) में निधन हो गया है। बुधवार सुबह 8.45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान ये हादसा हुआ। उनके साथ प्लेन में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई। भास्कर एक्सप्लेनर में अजित पवार की पूरी कहानी…
शुरुआत: बारामती में पढ़ाई की, चाचा शरद से डरते थे
अजित पवार (Ajit Pawar) का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ था। वो शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं। अजित के पिता फिल्म जगत से जुड़े हुए थे और मुंबई में मौजूद वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे।
पवार के दादा, गोविंदराव पवार, बारामती सहकारी व्यापार में काम करते थे और उनकी दादी खेतों की देखभाल करती थीं। अजित के बड़े भाई का नाम श्रीनिवास है। श्रीनिवास कृषि और ऑटो मोबाइल से जुड़े बड़े बिजनेसमैन हैं। कहा जाता है कि अजित अपने महत्वपूर्ण फैसलों में बड़े भाई की सलाह लेते हैं।
1995 में अजित बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने।
महाराष्ट्र एजुकेशन सोसाइटी हाई स्कूल बारामती से उन्होंने शुरूआती पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में ही उनके पिता का निधन हो गया। अजित ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में शिवाजी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है।
अजित शुरुआत में शरद पवार के पर्सनल सेक्रेटरी रहे। एक चैनल को दिए इंटरव्यू में बचपन का जिक्र करते हुए अजित ने कहा था,
अजित ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री पदम सिंह पाटिल की बहन सुनेत्रा पवार से शादी की है। इनके दो बेटे, जय पवार और पार्थ पवार हैं। सुप्रिया सुले, अजित की चचेरी बहन हैं।
राजनीति की पाठशालाः जब शरद पवार के लिए छोड़ दी अपनी लोकसभा सीट
अजित पवार ने 1982 में राजनीति में कदम रखा। तब वे एक को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री बोर्ड के लिए चुने गए थे। इसके बाद वे 1991 में पुणे जिला सहकारी बैंक (पीडीसी) के अध्यक्ष बने और 16 साल तक इस पद पर रहे।
1993 में पहली बार बारामती से सांसद बने। उपचुनाव हुआ, तो चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी। यहीं से जीतकर शरद, पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में रक्षा मंत्री बने।
राजभवन में सुबह 8 बजे गवर्नर भगतसिंह कोश्यारी ने दिलाई शपथ।
1996 से 2004 तक बारामती से शरद पवार सांसद रहे। 1995 में अजित बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। फिर 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी यहीं से विधायक चुने गए। 1999 में विलासराव देशमुख की सरकार में उन्हें सिंचाई विभाग में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
दरारः सुप्रिया सुले के राजनीति में आने से खतरे में पड़ी उत्तराधिकारी की कुर्सी
2004 में जब NCP की 71 सीटें आईं, तब शरद ने कांग्रेस (69 सीटें) को सरकार बनाने का मौका दिया। अजित, शरद के इस फैसले से नाराज हुए थे। अजित पवार के सहयोगियों का मानना था कि ये उनको दरकिनार करने के लिए किया जा रहा है। उनके चाचा उनको मुख्यमंत्री बनाने से रोकने के लिए ये सब कर रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार उदय तनपाठक बताते हैं, राजनीतिक गलियारों में ये माना जाता था कि अजित पवार ही शरद की सत्ता संभालेंगे। 2009 के बाद अजित की चचेरी बहन सुप्रिया सुले राजनीति में आ गईं और यहीं से फूट पड़ने की शुरुआत मानी जाने लगी।
अजित और शरद पवार के रिश्ते को लेकर वो कहते हैं ‘अजित ने उन्हें हमेशा फादर फिगर की तरह देखा है। पार्टी में रहते उन्होंने जितने भी फैसले लिए वो शरद की मर्जी से ही लिए।’
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सीनियर जर्नलिस्ट मयूर पारेख बताते हैं कि अजित पवार और शरद पवार भले ही एक ही राजनीतिक घराने से आते हैं लेकिन दोनों की राजनीति में बहुत ज्यादा अंतर है। शरद पवार कभी भी स्पष्ट बात नहीं कहते हैं, जबकि अजित को अगर किसी बात को लेकर ना कहना है तो वो कभी भी बोलने से चूकते नहीं हैं।
बगावतः रातों रात पाला बदलकर सुबह डिप्टी सीएम बन गए अजित
22 नवंबर 2019, शाम 4 बजे का वक्त। कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के सभी दिग्गज नेता नेहरू सेंटर मुंबई में एक-एक कर पहुंच रहे थे। बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन टूटने के बाद महाराष्ट्र में पिछले चार हफ्ते से तय नहीं हो पाया था कि सरकार कौन बनाएगा और किसके साथ मिलकर बनाएगा। इस लिहाज से ये बैठक बेहद अहम थी।
सेंटर टेबल पर NCP अध्यक्ष शरद पवार और ठीक बगल में उनके भतीजे अजित पवार एक फाइल लिए बैठे थे। हाव-भाव से लग रहा था जैसे वो मीटिंग से ऊब रहे हों। तभी अजित के मोबाइल पर एक मैसेज आया। वो वॉशरूम जाने के बहाने बाहर चले गए और करीब 10 मिनट तक फोन पर बात करते रहे। वापस लौटे तो उनका अंदाज और चेहरे के भाव बदल चुके थे। बैठक में मौजूद किसी को अंदाजा नहीं था कि अगली सुबह क्या होने वाला
22 नवंबर 2019 को महाविकास अघाड़ी की बैठक में तय हुआ कि उद्धव ठाकरे पांच साल तक सरकार चलाएंगे। अगले दिन 23 नवंबर को तड़के 6:30 बजे शरद पवार एक फोन कॉल से जागे। फोन पर किसी ने घबराहट से कहा, ‘मैं अभी-अभी राजभवन से लौटा हूं, आप एक बार न्यूज चैनल देखिए।’ ये फोन शरद पवार की पार्टी के सदस्य का था।
शरद को कुछ शक हुआ
2024 के लोकसभा चुनाव में अजित ने अपनी बहन सुप्रिया सुले के खिलाफ पत्नी सुनेत्रा को चुनाव में खड़ा किया था, लेकिन सुनेत्रा हार गईं।
शरद को कुछ शक हुआ, फोन रखते ही फौरन उन्होंने अखबार देखा। टाइम्स ऑफ इंडिया ने छापा था ‘अगले पांच साल सर्वसम्मति से उद्धव सीएम होंगे। अगले ही पल उन्होंने टेलीविजन पर न्यूज चैनल खंगाले तो देखा हेडलाइन थी- देवेंद्र फडणवीस लेंगे सीएम पद की शपथ। अजित पवार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम होंगे।
पवार को समझने में देर नहीं लगी। उन्होंने तुरंत उद्धव ठाकरे को फोन घुमाया। 2 दिसंबर 2019 को एक न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में शरद पवार ने बताया था, ‘मैंने सबसे पहले उद्धव ठाकरे को फोन किया और कहा, ये जो कुछ भी हुआ है ये ठीक नहीं है। हमें ठीक करना होगा। हमने जो तय किया है वही होगा।’
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