Latest Hindi News : पांच राज्यों में 2026 में होंगे विधानसभा चुनाव, उपचुनाव की तैयारियाँ तेज

By Anuj Kumar | Updated: December 9, 2025 • 11:43 AM

नई दिल्ली,। बिहार विधानसभा चुनाव समाप्त होने के साथ ही देश एक नए चुनावी दौर में प्रवेश कर रहा है। आने वाले महीनों में देश के कई राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होंगी, क्योंकि वर्ष 2026 में पांच प्रमुख राज्यों—असम, केरल (Kerala) तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल (West Bengal) और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन राज्यों में चुनावी तैयारियां धीरे-धीरे गति पकड़ने लगी हैं और क्षेत्रीय दलों से लेकर राष्ट्रीय पार्टियों ने अपनी रणनीतियों को मजबूत करना शुरू कर दिया है।

असम, केरल और तमिलनाडु: चुनावी समीकरण बनना शुरू

असम की 126 सीटों वाली विधानसभा में मुकाबला जातीय संतुलन, विकास कार्यों और क्षेत्रीय राजनीति पर आधारित रहता है। केरल की 140 सीटों पर हर बार वाम मोर्चा और यूडीएफ (UDF) के बीच जोरदार टक्कर देखने को मिलती है। तमिलनाडु की 234 सीटों वाली विधानसभा में द्रविड़ राजनीति का वर्चस्व है, जहां डीएमके और एआईएडीएमके के बीच मुख्य संघर्ष रहता है।

पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी भी रहेंगे चुनावी केंद्र में

पश्चिम बंगाल 294 सीटों के साथ देश की राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है। पिछले चुनावों की तरह 2026 में भी यहां कड़ा मुकाबला होने की संभावना है।पुडुचेरी भले ही 30 सीटों वाला छोटा केंद्र शासित प्रदेश है, लेकिन दक्षिण भारतीय राजनीति में इसकी भूमिका अहम मानी जाती है।

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कई राज्यों में खाली सीटें, उपचुनाव की तैयारी तेज

इसी बीच कई विधानसभा सीटें विधायकों के निधन के कारण रिक्त हो गई हैं, जिन पर उपचुनाव कराए जाने की तैयारी है। गोवा की पोंडा सीट भाजपा विधायक रवि नाइक के निधन के बाद खाली हुई। कर्नाटक की बागलकोट सीट कांग्रेस विधायक एच.वाई. मेती के निधन से रिक्त है। महाराष्ट्र की राहुरी सीट भाजपा विधायक शिवाजी कर्दिले के निधन के बाद खाली है। मणिपुर की ताडुबी सीट 18 जनवरी से खाली पड़ी है। नागालैंड की कोरिडांग सीट भी भाजपा विधायक इमकोंग एल. इमचेन के निधन के बाद रिक्त हो चुकी है।

चुनाव आयोग जल्द कर सकता है उपचुनावों की घोषणा

चुनाव आयोग इन उपचुनावों की तारीखें जल्द घोषित कर सकता है। आने वाला नया साल देश को एक बार फिर व्यापक चुनावी सरगर्मी की ओर ले जा रहा है। ऐसे में राजनीतिक दल अपनी रणनीतियाँ तेज करेंगे, वहीं लोकतंत्र की मजबूती जनता की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करेगी।

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