थाईलैंड ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं
सैनिकों के बीच फायरिंग, दो थाई लोगों की मौत। इससे पहले दोनों देशों के सैनिकों ने गुरुवार सुबह सीमा के पास एक-दूसरे पर फायरिंग की। इस गोलीबारी हमले(attack) में दो थाई लोगों की मौत हो गई हैं, जबकि दो सैनिक घायल हुए हैं।
कंबोडिया(combodia) के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि थाई सैनिकों ने पहले गोली चलाई। जबकि थाईलैंड की सेना ने कहा कि कंबोडिया ने सेना भेजने से पहले एक ड्रोन तैनात किया था, इसके बाद तोप और लंबी दूरी के BM21 रॉकेटों से गोलीबारी शुरू कर दी थी।
कंबोडिया में अपने राजदूत को वापस बुला लिया
यह गोलीबारी थाईलैंड के सुरिन प्रांत और कंबोडिया के प्राचीन प्रसात ता मुएन थॉम मंदिर के पास हुई। हमले को देखते हुए थाईलैंड ने बॉर्डर पर F-16 लड़ाकू विमान तैनात किया था।
इससे पहले 23 जुलाई को थाईलैंड ने कंबोडिया में अपने राजदूत को वापस बुला लिया था और कंबोडिया के राजदूत को निकाल दिया था। दोनों देशों के बीच विवाद 16 जुलाई को बढ़ा था, जब थाईलैंड ने कंबोडिया पर लैंडमाइंस बिछाने का आरोप लगाया, जिसमें 4 सैनिक घायल हुए थे।
थाईलैंड ने 40 हजार नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
थाईलैंड के जिला प्रमुख ने बताया कि हमले के बाद सीमा से लगे 86 गांवों से लगभग 40 हजार थाई नागरिकों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह स्थित रॉयल थाईलैंड दूतावास ने कहा कि सीमा पर स्थिति बिगड़ती जा रही है और झड़पों के लंबे समय तक जारी रहने की संभावना के कारण, दूतावास ने अपने नागरिकों से जितनी जल्दी हो सके कंबोडिया छोड़ने को कहा है।
कंबोडियाई सेना के पास जवाबी हमला करने के अलावा कोई विकल्प नहीं
थाई दूतावास की घोषणा के कुछ ही देर बाद, थाईलैंड की सेना ने कहा कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए उसने सीमा पर एक एफ-16 जेट लड़ाकू विमान तैनात किया है।
कंबोडिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी कर थाईलैंड पर पहले हमला करने का आरोप लगाया। बयान के अनुसार, कंबोडियाई सैनिकों ने थाईलैंड की सेना के हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की और यह केवल आत्मरक्षा में की गई थी।
देश के पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि थाईलैंड की सेना ने सीमा से लगे दो कंबोडियाई प्रांतों, ओद्दार मीन्चे और प्रीह विहियर पर गोलाबारी की है।
हुन सेन ने कहा- कंबोडियाई सेना के पास जवाबी हमला करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने जनता से शांत रहने का आह्वान किया।
थाईलैंड- कंबोडिया ने लैंडमाइंस बिछाई, 4 सैनिक घायल
कंबोडिया और थाईलैंड के बीच यह विवाद 16 जुलाई को बढ़ गया, जब थाईलैंड ने दावा किया कि कंबोडिया ने उनकी सीमा पर लैंडमाइंस बिछाईं है।
थाई प्राधिकारियों ने बताया- कुछ सैनिक उबोन रात्चाथानी और कंबोडिया के प्रीह विहियर प्रांत के बीच विवादित सीमा क्षेत्र के थाई हिस्से में गश्त कर रहें थे। तभी ये कंबोडिया के बिछाए गए लैंडमाइंस की चपेट में आ गए। जिसमें एक सैनिक का पैर कट गया, जबकि तीन घायल हो गए।
सैनिक पुरानी लैंडमाइंस के कारण घायल हुए
कंबोडिया ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि सैनिक पुरानी लैंडमाइंस के कारण घायल हुए।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद का इतिहास 118 साल पुराना है, जो प्रीह विहार मंदिर और आसपास के क्षेत्रों को लेकर है। दोनों देशों के बीच 1907 में 817 किमी की लंबी सीमा खींची गई थी। तब कंबोडिया फ्रांस के अधीन था। थाईलैंड ने हमेशा इसका विरोध किया, क्योंकि नक्शे में प्रीह विहियर नाम का ऐतिहासिक मंदिर कंबोडिया के हिस्से में दिखाया गया था।
इस पर दोनों देशों में विवाद चलता रहा। 1959 में कंबोडिया यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले गया और 1962 में अदालत ने फैसला दिया कि मंदिर कंबोडिया का है। थाईलैंड ने इसे स्वीकार किया लेकिन आसपास की जमीन को लेकर विवाद जारी रखा।
पहले किस नाम से जाना जाता था थाईलैंड और अर्थ क्या है?
थाईलैंड को पहले सियाम के नाम से जाना जाता था। थाई भाषा में देश का नाम “प्रथेत थाई” है, जिसका अर्थ है “स्वतंत्र लोगों की ज़मीन”। यह इस तथ्य को दर्शाता है कि थाईलैंड दक्षिण पूर्व एशिया का एकमात्र देश है जिसे कभी किसी यूरोपीय शक्ति द्वारा उपनिवेश नहीं बनाया गया।
थाईलैंड में सबसे लोकप्रिय धर्म कौन सा है और यहां के लोग नए साल को कैसे मनाते हैं?
लोकप्रिय धर्म बौद्ध धर्म है, और लगभग 95% थाई लोग बौद्ध धर्म का पालन करते हैं। थाईलैंड में अनगिनत बौद्ध मंदिर हैं, जिन्हें “वाट” के नाम से जाना जाता है। थाईलैंड में स्थानीय लोग अप्रैल में नया साल मनाते हैं जिसे थाई नव वर्ष या सोंगक्रान कहा जाता है।
यह हर साल 13 अप्रैल को मनाया जाता है और 3 या 4 दिनों तक चलता है। सोंगक्रान के दौरान लोग अपने घरों को साफ करते हैं, अपने बड़ों से मिलते हैं, भव्य भोजन का आनंद लेते हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक-दूसरे पर पानी फेंकते हैं, जो भारत में होली के समान है।