పట్టాలు తప్పిన రైలు పట్టాలు తప్పిన చెన్నై ఎక్స్ ప్రెస్ రైలు నేటి నుంచి భారత్ ట్యాక్సీ సేవలు రికార్డు స్థాయికి చేరిన భారత్-చైనా ట్రేడ్ క్రీడా సంఘాల పాలనపై సుప్రీం కోర్టు కీలక వ్యాఖ్యలు ఉచిత పథకాలపై ఆర్థిక సర్వే హెచ్చరిక ముగిసిన అజిత్ పవార్ అంత్యక్రియలు ప్రపంచ దేశాలకు భారత్ షాక్ నేటి నుంచి పార్లమెంట్ బడ్జెట్ సమావేశాలు మహారాష్ట్ర డిప్యూటీ సీఎం అజిత్ పవార్ దుర్మరణం పట్టాలు తప్పిన రైలు పట్టాలు తప్పిన చెన్నై ఎక్స్ ప్రెస్ రైలు నేటి నుంచి భారత్ ట్యాక్సీ సేవలు రికార్డు స్థాయికి చేరిన భారత్-చైనా ట్రేడ్ క్రీడా సంఘాల పాలనపై సుప్రీం కోర్టు కీలక వ్యాఖ్యలు ఉచిత పథకాలపై ఆర్థిక సర్వే హెచ్చరిక ముగిసిన అజిత్ పవార్ అంత్యక్రియలు ప్రపంచ దేశాలకు భారత్ షాక్ నేటి నుంచి పార్లమెంట్ బడ్జెట్ సమావేశాలు మహారాష్ట్ర డిప్యూటీ సీఎం అజిత్ పవార్ దుర్మరణం

Barua Ghat : न्यू ईयर पर बरुआ घाट बना सैलानियों की पहली पसंद

Author Icon By Surekha Bhosle
Updated: December 31, 2025 • 4:28 PM
వాట్సాప్‌లో ఫాలో అవండి

दामोदर नदी का शांत तट और हरियाली खींच रही भीड़

नववर्ष के अवसर पर बरुआ घाट पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन गया है। दामोदर नदी के तट पर बहती स्वच्छ धारा और चारों ओर फैली हरियाली लोगों को प्रकृति से जुड़ने का अवसर दे रही है।

प्रकृति की गोद में नए साल का स्वागत

परिवार और दोस्तों संग पिकनिक के लिए आदर्श स्थान-बरुआ घाट (Barua Ghat) पर बड़ी संख्या में लोग परिवार और मित्रों के साथ पिकनिक मनाते नजर आए। शांत वातावरण और खुली जगह ने इसे न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए एक आदर्श स्पॉट बना दिया है

नए साल के स्वागत की तैयारियों के बीच बोकारो और आसपास के पिकनिक स्थलों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। छुट्टियों का लुत्फ उठाने के लिए परिवार, युवा और पर्यटक सुबह से ही झीलों, पार्कों, पहाड़ियों और जलप्रपातों की ओर रुख कर रहे हैं। न्यू ईयर सेलिब्रेशन (New Year’s celebration) के लिए लोगों की पसंदीदा पिकनिक स्पॉट्स में से एक है बरुआ घाट।

बोकारो स्टील सिटी और चंद्रपुरा के बीच स्थित बरुआ घाट इन दिनों एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल के रूप में उभरा है। सेक्टर-9 से लगभग चार किलोमीटर दूर पचौरी गांव और रानी पोखर बस्ती के पास दामोदर नदी के किनारे बसा यह घाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। यहां झारखंड, बिहार और बंगाल से भी काफी लोग आते हैं।

अन्य पढ़े: Delhi Fog Alert : नए साल से पहले दिल्ली में घना कोहरा, उड़ानें प्रभावित

पिकनिक मनाने वालों की भारी भीड़ उमड़ती है यहां

यह स्थल शहर की भागदौड़ से दूर सुकून के पल बिताने के लिए आदर्श माना जाता है। चौड़ा नदी तट, बहती दामोदर नदी, चारों ओर हरियाली और खुला आसमान इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।

विशेषकर सर्दियों और नए साल के अवसर पर यहां पिकनिक मनाने वालों की भारी भीड़ उमड़ती है। सुबह और शाम के समय घाट का नजारा मनमोहक होता है, जबकि सूर्यास्त के समय नदी पर पड़ती सूर्य की लालिमा इसकी सुंदरता बढ़ा देती है।

यहां डैम और नदी दोनों का आनंद मिलता है

पिकनिक मनाने आए लोगों का कहना है कि यहां का प्राकृतिक माहौल मन को शांति प्रदान करता है। यहां पिकनिक मनाने पहली बार आईं जूही शर्मा और बरखा ने बताया कि परिवार और दोस्तों के साथ प्राकृतिक परिवेश में समय बिताना एक यादगार अनुभव है। चंदनक्यारी से आईं शीला झा ने इसे “मुफ्त प्राकृतिक वाटर पार्क” बताते हुए कहा कि यहां डैम और नदी दोनों का आनंद मिलता है। रांची की भवानी झा ने इसे मायके से जुड़ी यादों के कारण खास बताया।

चेतावनी बोर्ड या प्रशासनिक निगरानी नहीं

हालांकि, बरुआ घाट की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद यहां सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव है। डीवीसी प्लांट के कार्यों के लिए बनाए गए इस घाट पर वर्तमान में कोई सुरक्षा व्यवस्था, चेतावनी बोर्ड या प्रशासनिक निगरानी नहीं है। घाट से ऊंचाई पर गिरता पानी आकर्षक है, लेकिन इसमें स्नान करना जोखिम भरा हो सकता है। पूर्व में यहां दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।

स्थानीय लोग और समाजसेवी प्रशासन से सुरक्षा, साफ-सफाई और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि इन कमियों को दूर किया जाए, तो बरुआ घाट भविष्य में बोकारो क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल बन सकता है।

बड़े पिकनिक स्पॉट पर न गोताखोर न पर पुलिस

इधर, नगर के सिटी पार्क, कूलिंग पौंड, गरगा डैम, बरुआ घाट सहित दामोदर नदी के किनारे कई क्षेत्रों में लोग पुराने और नए साल पर पिकनिक मनाने पहुंचते हैं। इनमें युवा सहित सभी लोग काफी उत्साहित रहते हैं। इन स्थानों पर सुरक्षा के कोई व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है। ना ही पुलिस की मौजूदगी और ना ही गोताखोरों की उपस्थिति। जबकि नए साल के आगमन को लेकर जिले के सभी पिकनिक स्थलों पर भीड़ जुटती है।

नया साल मनाने का इतिहास क्या है?

ईसा पूर्व 46 में रोमन सम्राट जूलियस सीज़र ने कैलेंडर में सुधार करते हुए जनवरी महीने को साल का पहला महीना घोषित किया। बाद में 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने इसमें और सुधार कर ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू किया, जिसे आज हम आधुनिक कैलेंडर के रूप में जानते हैं। तभी से 1 जनवरी को विश्वभर में नव वर्ष के रूप में मनाया जाने लगा।

अन्य पढ़े:

#BreakingNews #HindiNews #LatestNews #NewYearCelebration #NatureLovers #DamodarRiver

గమనిక: ఈ వెబ్ సైట్ లో ప్రచురించబడిన వార్తలు పాఠకుల సమాచార ప్రయోజనాల కోసం ఉద్దేశించి మాత్రమే ఇస్తున్నాం. మావంతుగా యధార్థమైన సమాచారాన్ని ఇచ్చేందుకు కృషి చేస్తాము.