खराब मौसम में हवा में चक्कर काटता रहा विमान
बेंगलुरु: रविवार को हैदराबाद(Hyderabad) से हुबली जा रही Fly-91 एयरलाइन की उड़ान (IC3401) में सवार 22 यात्रियों के लिए वह सफर एक बुरे सपने जैसा रहा। खराब मौसम के कारण विमान हुबली में लैंड नहीं कर सका और करीब 2 घंटे तक हवा में ही चक्कर काटता रहा। फ्लाइट शाम 4:30 बजे हुबली पहुँचने वाली थी, लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते उसे हुबली के आसपास करीब एक घंटे तक होल्ड पर रखा गया। अंततः सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शाम 6:30 बजे विमान को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया।
वीडियो में दिखी यात्रियों की दहशत
सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस फ्लाइट के वीडियो ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। विमान के अंदर का माहौल बेहद तनावपूर्ण था; तेज झटकों के कारण यात्री अपनी सीटों पर घबराए हुए थे। वीडियो में कई यात्री रोते हुए और हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना करते दिखाई दिए। केबिन के अंदर से ‘ओह माईगॉड’ जैसी आवाज़ें और यात्रियों के बीच एक-दूसरे को हिम्मत बंधाने की कोशिशें साफ सुनाई दे रही थीं। एक यात्री को यह कहते हुए सुना गया कि पायलट से विमान को बेंगलुरु या बेलगाम ले जाने की गुजारिश की जाए।
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एयरलाइन का स्पष्टीकरण: तकनीकी खराबी नहीं, सुरक्षा है प्राथमिकता
घटना के बाद सोशल मीडिया पर फैली तकनीकी खराबी की अफवाहों पर Fly-91 एयरलाइन ने आधिकारिक बयान जारी किया। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि विमान में कोई तकनीकी समस्या नहीं थी; विमान का डायवर्जन और होल्डिंग केवल खराब मौसम के कारण सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा था। कंपनी ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया गया। बेंगलुरु में रुकने के बाद, इसी फ्लाइट को रात 11 बजे पुनः हुबली के लिए रवाना कर दिया गया। गौरतलब है कि खराब मौसम के कारण इसी दौरान एक अन्य फ्लाइट (मुंबई-कोल्हापुर) को भी गोवा डायवर्ट करना पड़ा था।
फ्लाइट को हुबली के बजाय बेंगलुरु क्यों ले जाना पड़ा?
खराब मौसम के कारण हुबली एयरपोर्ट पर लैंडिंग की स्थिति नहीं थी। सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत, विमान को सुरक्षित स्थान पर ले जाना आवश्यक था, इसलिए उसे बेंगलुरु एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट किया गया।
क्या विमान में कोई तकनीकी खराबी थी?
नहीं, Fly-91 एयरलाइन ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि विमान में कोई तकनीकी समस्या नहीं थी। यह पूरी घटना केवल खराब मौसम और सुरक्षा प्रोटोकॉल का परिणाम थी।
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