नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। इस सनसनीखेज हत्याकांड में अब मिंटू नामक व्यक्ति पुलिस के लिए सबसे अहम कड़ी बन गया है, जो वारदात के समय उसी एसयूवी में मौजूद था और सीटों के बीच छिपकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। जांच एजेंसियों का मानना है कि मिंटू के बयान से हमलावरों की पहचान और घटना की पूरी साजिश का खुलासा हो सकता है।
कोलकाता लौटते समय हुआ जानलेवा हमला
जानकारी के मुताबिक बुधवार देर रात चंद्रनाथ रथ (Chandranath Rath) कोलकाता लौट रहे थे। इसी दौरान उत्तर 24 परगना जिले में एयरपोर्ट के पास जैसोर रोड स्थित दोहरिया इलाके में उनकी स्कॉर्पियो को घेरकर हमला किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले एक हैचबैक कार ने एसयूवी का रास्ता रोका, जिसके तुरंत बाद बाइक सवार बदमाशों ने बेहद करीब से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी इतनी तेज थी कि चालक बुद्धदेव बेरा और चंद्रनाथ रथ गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में रथ की मौत हो गई।
सीटों के बीच छिपकर बची मिंटू की जान
फायरिंग के दौरान कार में मौजूद मिंटू सीटों के बीच छिप गया, जिससे उसकी जान बच गई। पुलिस का मानना है कि उसने हमलावरों को करीब से देखा होगा और वही घटना के अंतिम पलों की सटीक जानकारी दे सकता है। फिलहाल राज्य खुफिया शाखा और एसआईटी की टीम उससे लगातार पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों ने उसके बयान को गोपनीय रखा है ताकि मामले की जांच प्रभावित न हो।
घटनास्थल पर मचा था अफरा-तफरी का माहौल
घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई। घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे स्थानीय व्यापारी और भाजपा कार्यकर्ता सुशांत सरकार ने बताया कि शुरुआत में उन्हें गोलियों की आवाज पटाखों जैसी लगी। उन्होंने कहा कि पहले लगा कि कहीं चुनावी जीत या आईपीएल मैच का जश्न मनाया जा रहा है, लेकिन कुछ ही देर में पता चला कि कार सवार लोगों पर हमला हुआ है। जब वे एसयूवी के पास पहुंचे तो गाड़ी खून से लथपथ थी और चंद्रनाथ रथ बेहद गंभीर हालत में थे।
घायल ड्राइवर की हालत नाजुक
इस हमले में घायल चालक बुद्धदेव बेरा का इलाज कोलकाता के अपोलो मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों ने करीब छह घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद उनके शरीर से तीन गोलियां निकाली हैं। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक बेरा अभी वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं और अगले 72 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए पुलिस फिलहाल उनसे पूछताछ नहीं कर पा रही है।
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मिंटू पर टिकी जांच की उम्मीदें
सीआईडी अधिकारियों का मानना है कि चालक की हालत में सुधार होने तक मिंटू ही इस पूरे हत्याकांड का सबसे अहम गवाह है। उसके बयान के आधार पर हमलावरों की पहचान और हत्या की साजिश से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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