नई दिल्ली।ब्रज की होली की शुरुआत बसंत पंचमी (Basant Panchami) से हो चुकी है, जो श्रीकृष्ण की भूमि पर मनाए जाने वाले 40 दिवसीय रंगोत्सव का प्रतीक है। वृंदावन, बरसाना, नंदगांव और मथुरा में मनाया जाने वाला यह होली उत्सव अपनी भक्तिमय रीति-रिवाज, जीवंत परंपराओं और गहरी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। राधा-कृष्ण की अद्भुत लीलाओं से जुड़ा ब्रज क्षेत्र 40 दिनों तक रंगों और भक्ति में डूबा रहता है।
मंदिरों से गलियों तक दिखती है होली की छटा
मंदिरों के आंगन से लेकर पतली गलियों तक हर कोने में पारंपरिक होली (Holi) की भावना देखने को मिलती है। ब्रज की होली नई शुरुआत, भक्ति और आनंद (Devotion and Joy) का प्रतीक मानी जाती है। खास रस्मों में मंदिरों के भीतर होली का डंडा लगाना शामिल है, जो उत्सव की औपचारिक शुरुआत का संकेत होता है।
फूलों, लट्ठमार और लड्डू मार होली की अनूठी परंपरा
रंगोत्सव के दौरान भक्त राधा-कृष्ण को फूलों से बने रंग और गुलाल अर्पित करते हैं। ब्रज के मंदिरों में फूलों की होली, लट्ठमार होली और लड्डू मार होली जैसे अनोखे आयोजन होते हैं, जो सदियों पुरानी परंपराओं का हिस्सा हैं। भक्तों के लिए ब्रज में होली खेलना एक आध्यात्मिक आशीर्वाद के रूप में देखा जाता है।
आस्था और लोकसंस्कृति का संगम है ब्रज होली
ब्रज की होली 40 दिनों तक चलने वाला ऐसा पर्व है, जिसमें आस्था और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। हर रस्म राधा-कृष्ण के दिव्य मिलन को दर्शाती है, जिससे भक्तों को पौराणिक परंपराओं में वर्णित होली को नजदीक से अनुभव करने का दुर्लभ अवसर मिलता है।
वृंदावन से बरसाना तक रंग-भक्ति की यात्रा
वृंदावन के मंदिरों से लेकर बरसाना की गलियों और नंदगांव के आंगनों तक ब्रज होली रंग, भक्ति और सांस्कृतिक विरासत की एक अनुपम यात्रा का भरोसा दिलाती है।
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ब्रज में होली के प्रमुख आयोजन व तिथियां
24 फरवरी (मंगलवार) – लड्डू मार होली (फाग निमंत्रण), श्रीजी मंदिर, बरसाना
25 फरवरी (बुधवार) – लट्ठमार होली, रंगीली गली, बरसाना
26 फरवरी (गुरुवार) – लट्ठमार होली, नंद भवन, नंदगांव
27 फरवरी (शुक्रवार) – रंगभरनी एकादशी/फूलों वाली होली, बांकेबिहारी मंदिर, वृंदावन
1 मार्च (रविवार) – छड़िमर होली, गोकुल
2 मार्च (सोमवार) – रमन रेती होली / विधवा होली, गोकुल व वृंदावन
3 मार्च (मंगलवार) – होलिका दहन, द्वारकाधीश मंदिर मथुरा सहित अन्य मंदिर
4 मार्च (बुधवार) – रंगोत्सव, मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव व गोकुल
5 मार्च (गुरुवार) – दाऊजी का हुरंगा, दाऊजी मंदिर, मथुरा
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