कलकत्ता हाईकोर्ट ने शादीशुदा कपल के एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर पर बड़ी बात कही है। कोर्ट ने कहा कि शादी के बाद किसी अन्य के साथ सहमति से बनाए गए संबंध अपराध की श्रेणी में नहीं आते। कोर्ट ने यह कहते हुए मामला खारिज कर दिया।
कलकत्ता सहमति से बना रिश्ता हमेशा सही होता है? क्या शादी और उम्र की स्थिति से फर्क पड़ता है? क्या शादी के बाद भी पार्टनर किसी अन्य से संबंध बना सकता है? इसको लेकर समाज में बड़ी उलझने हैं। आए दिन इन पर कोर्ट के फैसले लोगों को हैरान करते रहते हैं। अब कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने फैसले में चौंकाने वाली बात कही है।
शारीरिक संबंध के लिए सहमति आपसी आकर्षण
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शादीशुदा कपल के मामले में बड़ी टिप्पणी की। एक महिला ने अपने प्रेमी पर झूठे शादी के वादे से संबंध बनाने का आरोप लगाया। दोनों पहले से शादीशुदा थे और दो साल से अफेयर में थे। जब महिला के पति को अफेयर का पता चला तो उसने साथ रहने से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला ने प्रेमी से शादी के लिए कहा लेकिन उसने शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला कोर्ट तक पहुंच गया। मामले की सुनवाई करते हुए जज बिभास रंजन ने कहा कि दोनों बालिग हैं और शादीशुदा भी। ऐसे में उनका रिश्ता आपसी सहमति से था न कि धोखा। इसके बाद कोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया और कहा कि ये अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।
न्यायाधीश ने आगे कहा कि कपल मैच्योर हैं जो एक-दूसरे की वैवाहिक प्रतिबद्धताओं से पूरी तरह परिचित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में दी गई सहमति को जबरन या झूठे वादे के द्वारा गुमराह किए जाने के बजाय सहमति से माना जाएगा। क्योंकि शारीरिक संबंध के लिए प्रारंभिक सहमति को आपसी आकर्षण पर आधारित माना जाएगा।
जानें पूरा मामला
बता दें कि पूरा मामला विवाहित महिला से जुड़ा है जिसने एक विवाहित युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसे शादी का झूठा वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। दोनों के बीच दो साल से विवाहोत्तर संबंध थे। जब महिला के पति को संबंध के बारे में पता चला और उसने शादी जारी रखने से इनकार कर दिया तो उसने उस युवक से शादी करने की कोशिश की जिसके साथ उसका संबंध था।जब युवक ने शादी से इनकार किया तो युवती ने मयनागुड़ी थाने में बीएनएस की धारा 69 और 351 (2) के तहत मामला दर्ज कराया।