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Latest Hindi News : सुनाली खातून सहित 6 लोगों की नागरिकता की होगी जांच – सुप्रीम कोर्ट

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: November 26, 2025 • 1:53 PM
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नई दिल्ली,। अवैध प्रवासी करार देकर बांग्लादेश भेजे गए सुनाली खातून (Sunali Khatoon) और उनके परिवार के पांच सदस्यों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल इन छह लोगों को भारत (India) वापस लाया जाए और उसके बाद उनके नागरिकता संबंधी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की जाए। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकता साबित न कर पाने वाले प्रवासियों पर सख्ती जारी रहनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने दी केंद्र को अहम सलाह

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े, कपिल सिब्बल (Kapil Sibbal) और जी. शंकरनारायणन ने दलील दी कि सुनाली खातून, उनके पति दानिश शेख और बेटे साबिर सहित छह लोगों के पास नागरिकता प्रमाणित करने वाले दस्तावेज मौजूद थे। इसलिए, बिना उचित जांच के उन्हें निर्वासित करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट पहले ही इन्हें वापस लाने का आदेश दे चुका है।

दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच पर कोर्ट का जोर

केंद्र सरकार की अपील पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि अब जब जमीन के रिकॉर्ड, ग्राम पंचायत दस्तावेज और रिश्तेदारों के बयान जैसे कुछ सबूत सामने आ गए हैं, तो सरकार को उन्हें वापस लाकर नागरिकता की पूरी जांच करनी चाहिए। बेंच ने कहा, आपने निर्वासन से पहले कोई ठोस जांच नहीं की। उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसी के साथ पीठ ने एक अंतरिम समाधान के रूप में सुझाव दिया कि सरकार छह लोगों को वापस बुलाए, दस्तावेजों की जांच करे और उचित प्रक्रिया अपनाते हुए उनके भारतीय नागरिक होने या न होने का फैसला करे। हालांकि कोर्ट ने यह भी माना कि अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को भारत से हटाना बिल्कुल सही कदम है और केंद्र से सोमवार तक इस सुझाव पर जवाब मांगा है।

क्यों केंद्र ने हाईकोर्ट के आदेश को दी चुनौती?

केंद्र सरकार ने इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वह चार सप्ताह में ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के सहयोग से इन छह लोगों को भारत वापस लाए। केंद्र का तर्क था कि निर्वासन से पहले इन लोगों ने भारतीय नागरिकता या भारत में कानूनी रूप से ठहरने का कोई दस्तावेज नहीं दिखाया। निर्वासन के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई गई और ग्राम पंचायत ने डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी किए, जिसके आधार पर बाद में दिल्ली और कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर हुईं। केंद्र ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस की जांच में ये लोग अवैध बांग्लादेशी प्रवासी साबित हुए थे और उन्होंने स्वयं भी अपना विदेशी होना स्वीकार किया था। अब सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद इस मामले में अगले सप्ताह केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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