Prayagraj : संतों की संपत्ति पर सीएम योगी का सख्त बयान

Read Time:  1 min
योगी
योगी
FONT SIZE
GET APP

नाम लिए बिना एक संत पर तीखा प्रहार

सार्वजनिक मंच से दिया कड़ा संदेश- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों की भूमिका और उनके जीवन मूल्यों को लेकर बड़ा बयान दिया है। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्राधिकरण के दूसरे नोटिस का जवाब भेज दिया है. अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब में कहा, “पालकी से चलना सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. यह परंपरा आदि शंकराचार्य के काल से भी 2500 साल पुरानी है. उन्होंने अधिकारियों पर शंकराचार्य की मर्यादा भंग करने का आरोप भी लगाया।

प्रयागराज में माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Avimukteshwaranand Saraswati) और प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है. एक ओर मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस भेजा है, साथ ही यह भी चेतावनी दी कि उनके मेले में आने पर रोक भी लगाई जा सकती है. अब इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ की भी एंट्री हो गई है. सीएम ने किसी का नाम लिए बगैर ही कहा कि एक योगी और संन्यासी के लिए व्यक्तिगत प्रॉपर्टी नाम की कोई चीज नहीं होती, धर्म ही उसकी असली प्रॉपर्टी होती है

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर प्रदेश में जारी सियासत के बीच मुख्यमंत्री (Yogi Adityanath) योगी आदित्यनाथ ने साफ लफ्जों में निशाना साधते हुए कहा, “एक योगी, एक संत के लिए या फिर संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता, उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी भी कुछ नहीं होती, धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी होती है. राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है।”

बहुत से कालनेमि, सतर्क रहना होगाः CM योगी

उन्होंने आगे कहा, “अब कोई धर्म के खिलाफ आचरण करता है, तो ऐसे बहुत कालनेमि होंगे जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे, हमें ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा।”

इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्राधिकरण की ओर से भेजे गए दूसरे नोटिस का जवाब भेज दिया है. अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने जवाब में कहा, “पालकी से चलना सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. यह परंपरा आदि शंकराचार्य के काल से भी 2500 साल पुरानी है. उन्होंने अधिकारियों पर शंकराचार्य की मर्यादा भंग करने का आरोप भी लगाया।

धार्मिक भावना पर सीधा हमलाः अविमुक्तेश्वरानंद

जवाब में यह भी कहा गया कि उनके अनुयायियों के साथ मारपीट की गई और उन्हें अपमानित भी किया गया. पुलिस पर पालकी घसीटने और अपराधियों जैसा व्यवहार करने का भी दावा किया है. साथ ही परेड कराकर सार्वजनिक उपहास उड़ाने का गंभीर आरोप लगाया गया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से आरोप लगाया गया कि पालकी को जानबूझकर खतरनाक जगह ले जाया गया. उन्होंने नदी में गिराने की कोशिश को हत्या करने की कोशिश के बराबर बताया. उन्होंने कहा, “यह धार्मिक भावना पर सीधा हमला है।”

अन्य पढ़े: Bengaluru strange theft case : बेंगलुरु में अजीब चोर! महिलाओं के इनरवियर ही निशाना क्यों?

सरकार के पास बस बुलडोजर ही हैः अविमुक्तेश्वरानंद

मेले के शिविर हटाए जाने की बात पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, “इस सरकार के पास एक बुलडोजर ही तो है, चलवा दे हमारे शिविर पर. हम तो वैसे भी फुटपाथ पर बैठे हैं वहीं से देखेंगे।”

मेला प्रशासन की ओर से भूमि आवंटन को रद्द किए जाने और आगे से मेला में प्रवेश प्रतिबंधित किए जाने पर शंकराचार्य ने कहा कि ये लोग किस स्तर तक जाएंगे, यही देखते हैं. हमने नोटिस का जवाब दे दिया है लेकिन 18 जनवरी के नोटिस को कानूनगो कल बताते हैं कि यहां चस्पा किया था, फिर भी हमने जवाब दे दिया है।

कुछ संतों की ओर से उनके खिलाफ बयान दिये जाने पर शंकराचार्य ने कहा, “वो सब कार्यकर्ता हैं, सरकार के, बीजेपी के, तो अपना काम कर रहे हैं. उन्हें जैसा निर्देश होता है वैसा बोलते हैं।”

अन्य पढ़े:

Surekha Bhosle

लेखक परिचय

Surekha Bhosle

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।