कोलकाता,। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा चलाया जा रहा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) (SIR) अब पूरी तरह राजनीतिक जंग का मैदान बन चुका है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि एसआईआर के नाम पर राज्य में लाखों वैध मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि विशेष रूप से सीमावर्ती इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने की आड़ में अल्पसंख्यक और गरीब वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है।
एसआईआर में मौतों का आरोप
टीएमसी का दावा है कि एसआईआर शुरू होने के बाद अब तक राज्य में 40 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) भी शामिल हैं। राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वे एसआईआर का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि इसके अमानवीय और अव्यवस्थित तरीके का विरोध कर रहे हैं।
चुनाव आयोग ने टीएमसी के आरोप खारिज किए
चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बीएलओ पर दबाव स्थानीय टीएमसी कार्यकर्ताओं की धमकियों का नतीजा है, न कि आयोग की कोई गलती। आयोग ने सभी बीएलओ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और कार्यालय की सुरक्षा बढ़ाने के कदम उठाए हैं।
विशेष और इलेक्टोरल रोल ऑब्ज़र्वर नियुक्त
चुनाव आयोग ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुब्रत गुप्ता को ‘स्पेशल रोल ऑब्ज़र्वर’ और 12 अन्य आईएएस अधिकारियों को ‘इलेक्टोरल रोल ऑब्ज़र्वर’ नियुक्त किया है। ये अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि कोई पात्र भारतीय मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
निर्देशों का पालन न करने पर कड़ी कार्रवाई
चुनाव आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्लम, ऊंची इमारतों और कॉलोनियों में भी मतदान केंद्र बनाए जाएं। टीएमसी की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए आयोग ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का पालन न करने पर कठोर कार्रवाई होगी।
सीमावर्ती जिलों में विवाद और दोनों पक्षों की स्थिति
सीमावर्ती जिलों से वीडियो और तसवीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें लोग कथित रूप से भारत-बांग्लादेश सीमा पार करते दिख रहे हैं। टीएमसी इसे “वोट काटने की साजिश” बता रही है, जबकि आयोग का कहना है कि ये घुसपैठिए वापस अपने देश जा रहे हैं। ममता बनर्जी और टीएमसी सड़क से संसद तक आंदोलन की धमकी दे रहे हैं, जबकि आयोग संविधान के अनुच्छेद 326 का हवाला देकर साफ कर रहा है कि वोट का अधिकार सिर्फ भारतीय नागरिक को है। आने वाले दिनों में यह टकराव और भयंकर रूप ले सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं
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