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Latest Hindi News : जीपीएस सिस्टम में लगातार दिक्कतें, भारत की सुरक्षा के लिए नया खतरा

Anuj Kumar
Anuj Kumar
Latest Hindi News : जीपीएस सिस्टम में लगातार दिक्कतें, भारत की सुरक्षा के लिए नया खतरा

नई दिल्ली। आज हमारी जिंदगी पूरी तरह डिजिटल सिस्टम (Digital System) पर निर्भर हो चुकी है। कई सालों तक जीपीएस सिग्नल बिना समस्या चलते रहे, लेकिन पिछले एक साल में इसमें डर पैदा करने वाली गड़बड़ियां सामने आने लगी हैं।

विमानों के नेविगेशन में खतरनाक गड़बड़ियाँ

दिल्ली के आसमान में उड़ रहे विमान हों या समुद्री मार्ग के पास उड़ान भरने वाले हवाई जहाज—पायलटों ने बताया कि उनके नेविगेशन सिस्टम अचानक गलत दिशा दिखाने लगे। कई बार विमान की वास्तविक स्थिति से सैकड़ों किलोमीटर दूर की लोकेशन दिखाई देने लगी। अब कई देशों के विमानन विभाग इसे जीपीएस में जानबूझकर की गई दखलअंदाजी का नतीजा मान रहे हैं।

जीपीएस: दुनिया का सबसे भरोसेमंद नेविगेशन सिस्टम

जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) अमेरिका द्वारा संचालित एक विशाल सैटेलाइट नेटवर्क (Vishal Satelite Network) है, जिसमें 24 से अधिक सैटेलाइट लगातार पृथ्वी के ऊपर घूमते रहते हैं। ये सैटेलाइट अपनी पोजिशन और समय के सिग्नल भेजते हैं, जिनके आधार पर मोबाइल, विमान, जहाज और टेलिकॉम टावर अपना लोकेशन और टाइम तय करते हैं। 1973 में शुरू हुआ यह सिस्टम 1995 से पूरी क्षमता के साथ काम कर रहा है। अमेरिका आज भी इस पर हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है।

दुनिया मौजूद अन्य सिस्टम, लेकिन भरोसा अब भी जीपीएस पर

भले ही रूस का ग्लोनास, यूरोप का गैलीलियो और चीन का बेइदू जैसे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन सर्वाधिक भरोसेमंद जीपीएस ही माना जाता है। इनका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये दुनिया को एक ही जैसा और एकदम सटीक समय प्रदान करते हैं। इसी सही टाइमिंग और पोजिशनिंग के कारण हवाई जहाज, जहाज, ट्रेनें, ट्रक, खेती की मशीनें, वैज्ञानिक उपकरण, और मोबाइल नेविगेशन—सब कुछ जीपीएस के भरोसे चलता है।

युद्ध ने दिखाया—तकनीक ज़रूरी भी और कमजोर भी

जीपीएस को शुरुआत में सेना के इस्तेमाल के लिए बनाया गया था, ताकि खराब मौसम और मुश्किल इलाकों में भी दिशा पता चल सके। यूक्रेन युद्ध ने दिखा दिया कि यह तकनीक कितनी महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ कितनी संवेदनशील और कमजोर है। 2022 से रूस और यूक्रेन (Ukraine) ने एक-दूसरे के जीपीएस सिग्नलों में दखल दी, जिसके कारण ड्रोन, मिसाइल और कम्युनिकेशन सिस्टम गलत दिशा में जाने लगे। इसके बाद दोनों देशों को पुरानी नेविगेशन तकनीक और एंटी-जैम डिवाइस का सहारा लेना पड़ा।

2024 में जीपीएस दखल की घटनाएँ दोगुनी

अंतरराष्ट्रीय विमानन संस्था के अनुसार, वर्ष 2024 में करीब 4 लाख 30 हजार बार जीपीएस में दखल की घटनाएँ दर्ज हुईं। पिछले साल यह संख्या 2 लाख 60 हजार थी—यानी समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। कई जगह विमानों ने गलत दिशा दिखने या रास्ता अचानक बदलने की शिकायत की, जो सामान्य हालात में संभव नहीं।

भारत में भी बढ़ने लगी समस्या

भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। दिल्ली से जम्मू जा रहा एक विमान बीच सफर से लौट आया क्योंकि जीपीएस सही काम नहीं कर रहा था। नवंबर 2024 में दिल्ली एयरपोर्ट पर पहली बार जीपीएस में दखल की घटना की आधिकारिक पुष्टि हुई। इसके बाद डीजीसीए ने नियम बनाया कि ऐसी घटना होते ही 10 मिनट के अंदर रिपोर्ट करना अनिवार्य है।

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