लखनऊ । यूपी दिवस समारोह का रंगारंग समापन में लोक कलाकारों ने जलवा बिखेर दिया। राजधानी लखनऊ (Lucknow) में ‘यूपी दिवस-2026’ के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय भव्य सांस्कृतिक उत्सव में कलाकारों ने राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति, लोक परंपराओं व विकास यात्रा को विविध रूप से प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। राष्ट्र प्रेरणा स्थल (Rashtra Prerna Sthal) पर 24 से 26 जनवरी तक चले इस मुख्य कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान लाखों की संख्या में प्रदेशवासियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को जनोत्सव में बदल दिया।
प्रदर्शनियों ने प्रदेश की विकास यात्रा को दर्शाया
यूपी दिवस मुख्य समारोह में जहां विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों ने प्रदेश की विकास यात्रा को दर्शाया, वहीं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रमों ने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर उतारा। वाराणसी के सौरव-गौरव मिश्रा ने कथक नृत्य की शास्त्रीय लय प्रस्तुत की तो पूरन महाराज के तबला वादन ने मंच को झंकृत कर दिया। बनारस की श्वेता दुबे और आजमगढ़ के शीतला मोहन मिश्रा के मधुर गायन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया तो लखनऊ के विशाल गुप्ता ने शास्त्रीय नृत्य की छटा बिखेरी। उन्नाव के चंद्र भूषण ने नाटक का मंचन कर तालियां बटोरीं तो प्रसिद्ध इंडियन ओशन बैंड के रॉक व फ्यूज़न म्यूजिक ने खासकर युवा श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

वाराणसी के गणेश पाठक के भजन गायन ने भक्ति रस की वर्षा की
यूपी दिवस के दूसरे दिन, 25 जनवरी का मुख्य आकर्षण रही मुंबई के विनीत सिंह की सुगम संगीत की प्रस्तुति, जिसने श्रोताओं की जमकर वाहवाही बटोरी। इसके अलावा दिनभर चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में झांसी के वीरेंद्र सिंहल ने बुंदेली और लखनऊ की रंजना अग्रहरी ने लोक गायन से मंच पर मिट्टी की खुशबू बिखेरी। वाराणसी के गणेश पाठक के भजन गायन ने भक्ति रस की वर्षा की, झांसी की वंदना कुशवाहा ने राई लोकनृत्य और वाराणसी के राहुल-रोहित मिश्रा की कथक जोड़ी ने लय-ताल का जादू बिखेरा। दिल्ली के हरीश तिवारी ने शास्त्रीय गायन और लखनऊ के इल्मास खान ने तबला वादन से लोगों का दिल जीत लिया।
अजय पांडेय के लोक गायन और छेदीलाल के बिरहा गायन की खूब हुई वाहवाही
यूपी दिवस समारोह के समापन दिवस, 26 जनवरी को प्रसिद्ध गायिका प्रतिभा सिंह बघेल के भजन एवं सुगम संगीत ने श्रोताओं की जमकर प्रशंसा हासिल की। मथुरा की सुधा पाल ने लोक नृत्य तथा दिल्ली की देविका एस. मंगलामुखी ने कथक नृत्य प्रस्तुत कर आम जनमानस को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से परिचित कराया। लखनऊ के अजय पांडेय के लोक गायन और कौशांबी के छेदीलाल के बिरहा गायन ने लोक जीवन के विविध भावों को व्यक्त किया। रायबरेली के शिव व शिवांग के गायन के साथ विभिन्न घरानों की नृत्य एवं गायन प्रस्तुतियों ने उत्सव का शानदार समापन सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
उत्तर प्रदेश दिवस क्यों मनाया जाता है?
यह दिवस हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1950 में ब्रिटिशकाल के United Provinces का नाम बदलकर “उत्तर प्रदेश” रखा गया था — यानि यह राज्य का स्थापना दिवस है। यह दिन उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इतिहास, विकास यात्रा और उपलब्धियों को याद करने तथा राज्यवासियों में गर्व की भावना जगाने के लिए मनाया जाता है।
उत्तर प्रदेश दिवस 2025 का विषय क्या है?
उत्तर प्रदेश दिवस 2025 की थीम थी:
“Development and Heritage: Uttar Pradesh on the Path to Progress”
(विकास और विरासत: प्रगति के पथ पर उत्तर प्रदेश) — यह विषय राज्य के विकास और सांस्कृतिक विरासत को एक साथ उजागर करने पर केंद्रित था।
3. उत्तर प्रदेश की स्थापना कब और किसने की थी?
यूपी मूलतः ब्रिटिश शासन के दौरान United Provinces के नाम से जाना जाता था।
24 जनवरी 1950 को United Provinces का नाम “उत्तर प्रदेश” रखा गया। यह निर्णय भारत के राज्यपाल-जनरल द्वारा United Provinces (Alteration of Name) Order, 1950 के तहत हुआ।
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