अमरावती । तिरुमाला स्थित भगवान तिरुपति बालाजी (Tirupati Balaji) के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। अब भक्तों को दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर टिकट लेने की मजबूरी नहीं होगी। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के श्रीवाणी ट्रस्ट ने ट्रायल आधार पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग (Online Ticket Booking) सुविधा शुरू कर दी है।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग की शुरुआत
तिरुमाला तिरुपति मंदिर ट्रस्ट की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, श्रद्धालु अब तिरुपति बालाजी के दर्शन के लिए ऑनलाइन माध्यम से टिकट बुक कर सकेंगे। यह सुविधा 9 जनवरी 2026 से लागू की जा रही है।
रोजाना दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग की विंडो सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक खुली रहेगी।
शाम 4 बजे तक मिल सकेगा दर्शन
ऑनलाइन बुक किए गए टिकट के जरिए श्रद्धालु शाम 4 बजे तक भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन कर सकेंगे। ट्रस्ट का कहना है कि इस व्यवस्था से दर्शन प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और समयबद्ध बनाया जा सकेगा।
800 श्रीवाणी ब्रेक दर्शन टिकट ऑनलाइन
टीटीडी ने ऑफलाइन काउंटर्स से मिलने वाले श्रीवाणी ब्रेक दर्शन टिकट को हटाकर अब 800 टिकट प्रतिदिन ऑनलाइन कर दिए हैं। इसके अलावा ट्रस्ट ने पहले ही 500 एडवांस टिकट भी जारी कर दिए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को पहले से अपनी यात्रा की योजना बनाने में सुविधा मिल सके।
एक टिकट पर पूरे परिवार को दर्शन
ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि एक ऑनलाइन टिकट पूरे परिवार के लिए बुक किया जा सकता है। एक टिकट पर अधिकतम चार लोग दर्शन कर सकते हैं। इससे परिवार के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।
एक महीने के ट्रायल पर शुरू हुई व्यवस्था
तिरुमाला तिरुपति मंदिर ट्रस्ट ने यह ऑनलाइन टिकट बुकिंग सुविधा एक महीने के ट्रायल आधार पर शुरू की है। ट्रस्ट अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान श्रीवाणी दर्शन के समय और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया को देखते हुए इस व्यवस्था पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट की एडवाइजरी
मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि वे अधिक से अधिक ऑनलाइन बुकिंग का लाभ उठाएं। इससे उन्हें टिकट काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारों से छुटकारा मिलेगा और दर्शन को पहले से बेहतर तरीके से प्लान किया जा सकेगा।
डिजिटल व्यवस्था से दर्शन होंगे आसान
टीटीडी का मानना है कि डिजिटल मोड के जरिए टिकट बुकिंग शुरू होने से न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि दर्शन व्यवस्था भी अधिक पारदर्शी और सुगम बनेगी। आने वाले समय में इस सुविधा को और बेहतर बनाए जाने की योजना है।
तिरुपति बालाजी मंदिर का इतिहास क्या है?
तिरुपति के इतिहास को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं। लेकिन यह स्पष्ट है कि 5वीं शताब्दी तक यह एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका था। कहा जाता है कि चोल, होयसल और विजयनगर के राजाओं का आर्थिक रूप से इस मंदिर के निर्माण में खास योगदान था।
तिरुपति को 12 साल के लिए क्यों बंद किया गया था?
तिरुपति मंदिर 12 साल के लिए बंद होने की कोई ऐतिहासिक पुष्टि नहीं है, बल्कि यह एक लोकप्रिय किंवदंती (legend) है जो राजा के गलत कामों के कारण एक संत के श्राप से जुड़ी है, जिसके बाद 12 साल तक मंदिर शुद्धिकरण के लिए बंद रहा; हालांकि, यह भी बताया जाता है कि 12 साल में होने वाले ‘अष्टबंधना बालल्या महासंप्रोक्षणम’ जैसे अनुष्ठानों के कारण मंदिर आंशिक रूप से या सीमित समय के लिए बंद रहता है, लेकिन पूरी तरह नहीं।
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