नई दिल्ली । भारत तेजी से वैश्विक उच्च शिक्षा का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। कम शिक्षा लागत, विशाल युवा आबादी और रोजगार के बेहतर अवसरों के चलते विदेशी विश्वविद्यालय (Foreign university) भारतीय शहरों में अपने कैंपस खोलने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) इस दौड़ में सबसे आगे निकल चुका है और वैश्विक विश्वविद्यालयों के लिए भारत का सबसे मजबूत बाजार बनकर उभरा है।
दिल्ली-एनसीआर विदेशी विश्वविद्यालयों की पहली पसंद
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में पढ़ने वाले छात्रों (Student) का रोजमर्रा का खर्च दुनिया के कई बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है। दिल्ली-एनसीआर में खासकर गुरुग्राम विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है। अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी, दूतावासों की नजदीकी और फॉर्च्यून-500 कंपनियों की मौजूदगी यहां पढ़ने वाले छात्रों को पढ़ाई के बाद बेहतर करियर अवसर देती है।
भारत की युवा आबादी बनी बड़ा आकर्षण
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के करीब 15.5 करोड़ युवा हैं, जो दुनिया में सबसे बड़ा छात्र समूह है। यही वजह है कि भारत अब स्थानीय छात्र बाजार के रूप में विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए प्रमुख आकर्षण बन चुका है। अनुमान है कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहे तो 2040 तक विदेशी शिक्षण संस्थानों के लिए जगह की मांग 1.9 करोड़ वर्ग फीट तक पहुंच सकती है।
19 विदेशी संस्थानों को मिल चुकी है मंजूरी
फिलहाल देश में 19 विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान या तो संचालन शुरू कर चुके हैं या फिर उन्हें शिक्षा मंत्रालय से आशय पत्र (एलओआई) मिल चुका है। यह आंकड़ा आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
चार प्रमुख पैमानों पर हुआ शहरों का आकलन
रिपोर्ट में शहरों के शैक्षिक माहौल का मूल्यांकन चार मुख्य स्तंभों—आवाजाही, सामाजिक-आर्थिक संकेतक, उद्योग तंत्र और जनसांख्यिकीय अवसर तथा शैक्षणिक परिदृश्य—के आधार पर किया गया है। इस अध्ययन में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलूरु को बड़े पैमाने पर विदेशी संस्थानों के विस्तार के लिए सबसे अनुकूल शहर बताया गया है।
मुंबई और बेंगलूरु की अलग पहचान
मुंबई को बैंकिंग, एनबीएफसी, प्राइवेट इक्विटी, कैपिटल मार्केट और मीडिया-एंटरटेनमेंट का गढ़ बताया गया है। हालांकि यहां जमीन और जीवनयापन की ऊंची लागत बड़े परिसरों के विस्तार में चुनौती बनती है। वहीं बेंगलूरु आईटी, एआई, इंजीनियरिंग और रिसर्च आधारित उद्योगों का केंद्र है, जहां विदेशी विश्वविद्यालयों को टेक कंपनियों से सीधा जुड़ाव मिलता है।
कम लागत में विश्वस्तरीय शिक्षा का विकल्प
रिपोर्ट में कहा गया है कि लंदन, न्यूयॉर्क और सिडनी जैसे पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्रों की तुलना में भारतीय शहर कम लागत में विश्वस्तरीय शिक्षा और पढ़ाई के बाद बेहतर रोजगार की संभावनाएं प्रदान कर रहे हैं।
अन्य पढ़े: Delhi- संसद गेट पर निलंबित सांसदों का प्रदर्शन, पोस्टरों से पीएम पर समझौते का आरोप
छोटे शहर भी बन रहे नए एजुकेशन हब
दिल्ली-एनसीआर और महानगरों के अलावा चंडीगढ़ ट्राइसिटी, कोच्चि, गोवा, भुवनेश्वर और जयपुर जैसे शहर भी विदेशी विश्वविद्यालयों को आकर्षित कर रहे हैं। इन शहरों में कम कीमत पर जमीन, कम परिचालन लागत और उभरता शैक्षिक वातावरण विदेशी संस्थानों के लिए बड़े फायदे साबित हो रहे हैं।
Read More :