Latest Hindi News : सिर्फ नोटिस देने से तलाक मान्य नहीं, कानूनी प्रक्रिया पूरी करना ज़रूरी

By Anuj Kumar | Updated: November 6, 2025 • 12:27 PM

इंदौर । मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी (Justice Binod Kumar Divedi) की युगल पीठ ने विवाह विच्छेद के एक मामले में फैमिली कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कड़ी टिप्पणी की कि फैमिली कोर्ट ने अपने निर्णय में गंभीर त्रुटि की है।

49 साल पुराना विवाह, विवाद की शुरुआत

मामला इरशाद खान (Irshad Khan) द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। संक्षेप में, 6 जून 1976 को इरशाद खान का विवाह हसमतुल्लाह खान से मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था।

पति की दूसरी शादी और तलाक नोटिस का दावा

हसमतुल्लाह खान ने 12 जनवरी 1987 को दूसरी शादी करने के बाद यह दावा करते हुए फैमिली कोर्ट झाबुआ में वाद दायर किया कि उन्होंने अपनी पहली पत्नी इरशाद को तलाक का नोटिस भेज दिया है।

फैमिली कोर्ट का विवादित फैसला

फैमिली कोर्ट ने 2 मई 2023 को यह कहते हुए मामला खारिज कर दिया कि तलाक नोटिस भेजा जा चुका है और पत्नी को जानकारी मिल गई है, इसलिए विवाह स्वतः समाप्त माना जाए।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट की युगल पीठ ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ नोटिस भेजने या जानकारी मिलने भर से तलाक नहीं होता, बल्कि इसे कानूनी रूप से प्रमाणित करना आवश्यक है। बिना साक्ष्य, बिना मुद्दे तय किए और बिना दोनों पक्षों की पूरी सुनवाई किए विवाह समाप्त मान लेना कानून के विरुद्ध है।

पति को अनुचित लाभ देने जैसा फैसला

कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट का निर्णय पति को अनुचित लाभ देने वाला था और न्याय की भावना के विरुद्ध था।

विवाह बहाल, मामला फिर से सुना जाएगा

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त करते हुए विवाह को बहाल किया और निर्देश दिया कि दोनों पक्ष नवंबर के पहले सप्ताह में फैमिली कोर्ट झाबुआ में उपस्थित होकर विधि अनुसार सुनवाई करवाएँ।

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