क्यों ज़रूरी है पर्यावरण की रक्षा?
- प्रदूषण में लगातार बढ़ोत्तरी
- ग्लोबल वार्मिंग का खतरा
- जैव विविधता का नाश
बदलते वक़्त के साथ न केवल मौसम में बदलाव आते हैं, बल्कि हमारी ज़िम्मेदारियां भी बदलती हैं। पर्यावरण की जो अवस्था हमने बना दी है, उसमें सुधार भी हमारी ही ज़िम्मेदारी है।
हम इसकी वजह हैं
असल में, जलवायु परिवर्तन के लिए हम मनुष्य ज़िम्मेदार हैं। ख़ासकर जब हम घरों, फैक्ट्रियों और गाड़ियों में तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का इस्तेमाल करते हैं। इससे कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है जो वातावरण में गर्मी को पकड़ लेती है और पृथ्वी का तापमान बढ़ने लगता है। अमेरिकी वैज्ञानिकों के अनुसार, औद्योगिक क्रांति के बाद, जब से मानव ने बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधन जलाना शुरू किया, तब से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर लगभग 50% बढ़ चुका है, जो पृथ्वी के इतिहास में अप्रत्याशित रूप से उच्च है।
- भारत में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता वर्ष 2021 में 1,486 घनमीटर थी, जो वर्ष 2031 में घटकर 1367 घनमीटर रह जाएगी। इसलिए मोहल्ले में एक समिति बनाएं, जो समय-समय पर सभी पाइप लाइन का ध्यान रखे। पानी लीकेज होने या लोगों द्वारा व्यर्थ बहाने पर तत्काल क़दम उठाएं।
- जब भी ट्रेन या बस से कहीं बाहर जाएं तो आम, जामुन जैसे पेड़ों के बीज साथ रखें और उन्हें रास्ते में बीच-बीच में डालते जाएं, ताकि बरसात में अंकुर फूटकर भविष्य में बड़ा वृक्ष बन सके।
- छत पर सोलर पैनल लगाएं। एलईडी बल्ब या प्राकृतिक रोशनी का ज़्यादा उपयोग करें। रसायनों से जितनी दूरी बना सकें उतना बेहतर होगा।
- घर में रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली (छत का पानी वापस धरती के अंदर भेजना) होना चाहिए। इससे ट्यूबवैल रिचार्ज हो जाते हैं और भूजल का स्तर भी बना रहता है।
- मौसमी फल-सब्ज़ियां न केवल स्वास्थ्य के लिए अच्छी हैं, बल्कि इससे लंबे ट्रांसपोर्ट और कोल्ड स्टोरेज की ज़रूरत नहीं पड़ती। स्थानीय उत्पादों का उपयोग कार्बन फुटप्रिंट को कम करता है।
- प्लास्टिक भी पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं है। कपड़े की थैली, मिट्टी, कांच या स्टील के बर्तन, बांस से बने ब्रश आदि प्रयोग करें।