नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए भारी टोल टैक्स (Heavy Toll Tax) और प्रवेश शुल्क के विरोध में सोमवार को पंजाब-हिमाचल सीमा (Punjab Himachal Border) पर जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। मूसलाधार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और घंटों तक चक्का जाम जारी रखा।
किसान संगठनों के नेतृत्व में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन का नेतृत्व गौरव राणा, हरप्रीत सिंह भट्टो और भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेताओं ने किया। प्रदर्शनकारियों ने हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और पंचायत मंत्री अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सरकार को दी चेतावनी, आंदोलन तेज करने का ऐलान
आंदोलनकारी नेताओं ने साफ कहा कि यदि टोल टैक्स कम नहीं किया गया और नाके नहीं हटाए गए, तो आंदोलन और उग्र होगा। उनका कहना है कि अब किसी तरह के समझौते की गुंजाइश नहीं है और सरकार को जनहित में तुरंत फैसला लेना होगा। साथ ही पंजाब सरकार से भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की गई है।
प्रशासन ने संभाला मोर्चा, घंटों बाद खुला जाम
जाम की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। तहसीलदार संदीप कुमार और थाना प्रभारी जतिन कपूर के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। करीब ढाई घंटे के गतिरोध के बाद अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से मांगपत्र लिया और उसे उच्च स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद जाम खोला गया।
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1 अप्रैल को बड़े आंदोलन की चेतावनी
हालांकि जाम हट गया, लेकिन लंबी वाहनों की कतार के कारण यातायात सामान्य होने में करीब चार घंटे का समय लगा। इस बीच पठानकोट टैक्सी यूनियन के जिला प्रधान रिंकू कुमार ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो 1 अप्रैल को पठानकोट-डलहौजी और चंबा-धर्मशाला रूट पूरी तरह बंद किए जाएंगे। क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
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