मुख्य बातें: –
- पेपर लीक जांच में राजस्थान का बिवाल परिवार रडार पर, कई छात्रों के प्रदर्शन पर उठे सवाल
- अब जांच एजेंसियां इन चयनित छात्रों के रिकॉर्ड और परीक्षा परिणामों की गहन जांच कर रही हैं
NEET पेपर लीक मामले की जांच के बीच राजस्थान (Rajasthan) का एक परिवार एजेंसियों के निशाने पर आ गया है। आरोप है कि बिवाल परिवार के कुछ सदस्यों ने लीक पेपर अपने ही रिश्तेदारों और बच्चों तक पहुंचाया। हैरानी की बात यह है कि परिवार के कई बच्चे सामान्य शैक्षणिक प्रदर्शन के बावजूद (NEET) जैसी कठिन परीक्षा में सफल होकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों तक पहुंच गए। अब जांच एजेंसियां इन चयनित छात्रों के रिकॉर्ड और परीक्षा परिणामों की गहन जांच कर रही हैं।
परिवार के तीन सदस्य गिरफ्तार
जांच एजेंसियों ने इस मामले में दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल (Mangilal Biwal) और विकास बिवाल को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दिनेश और मांगीलाल ने लीक पेपर परिवार के बच्चों तक पहुंचाया। बताया जा रहा है कि परिवार के दो बच्चों ने इस वर्ष NEET परीक्षा दी है, जबकि पांच बच्चे पिछले साल परीक्षा पास कर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला ले चुके हैं।
औसत प्रदर्शन के बावजूद मेडिकल कॉलेज में प्रवेश
जांच के दौरान विकास बिवाल का शैक्षणिक रिकॉर्ड भी सवालों के घेरे में आया है। जानकारी के मुताबिक 12वीं में उसके केवल 55 प्रतिशत अंक थे, लेकिन NEET में उसने 86 प्रतिशत अंक हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट हासिल कर ली। सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार विकास का कॉलेज प्रदर्शन बेहद कमजोर था और वह जनवरी से लगातार अनुपस्थित चल रहा था। आंतरिक परीक्षाओं में भी उसे औसतन 30 प्रतिशत अंक ही मिल रहे थे।
गिरफ्तारी के बाद कॉलेज से गायब हुए छात्र
पुलिस कार्रवाई के बाद विकास कॉलेज से अचानक गायब हो गया था। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसी तरह परिवार की एक अन्य छात्रा पलक, जो जयपुर के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है, अपने चाचा की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही हॉस्टल छोड़कर चली गई। हालांकि पलक का स्कूली रिकॉर्ड अच्छा बताया जा रहा है और उसने NEET में 98.61 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, लेकिन मेडिकल कॉलेज में उसका प्रदर्शन सामान्य रहा।
अन्य छात्रों के रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में
मांगीलाल की बेटी प्रगति, जो दौसा मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही है, वह भी अपने पिता और भाई की गिरफ्तारी वाले दिन कॉलेज से छुट्टी लेकर चली गई थी। इसके अलावा परिवार के दो अन्य छात्र ऋषि और अमन भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। बताया जा रहा है कि ऋषि ने 12वीं की परीक्षा ग्रेस मार्क्स के सहारे 50 प्रतिशत अंकों से पास की थी।
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पिछले चयन की भी हो रही जांच
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या पिछले वर्षों में चयनित हुए परिवार के अन्य बच्चों को भी किसी अनुचित तरीके से फायदा पहुंचाया गया था।
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