बच्चों को कुत्ते का झूठा खाना खिलाना पड़ा महंगा
कहा- रेबीज होने पर इलाज संभव नहीं, एजुकेशन-सेक्रेटरी से मांगा जवाब
बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़(Chattisgarh) के बलौदाबाजार जिले के सरकारी स्कूल में मध्यान्ह भोजन के दौरान बच्चों को कुत्ते का जूठा भोजन खिलाया गया। इस पर हाईकोर्ट(High Court) ने नाराजगी जाहिर की है। मीडिया रिपोर्ट्स को जनहित याचिका मानकर हाईकोर्ट ने राज्य शासन के स्कूल शिक्षा सचिव को मामले में चार बिंदुओं पर शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है।
चीफ जस्टिस(Chief Justice) रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने यह भी पूछा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने क्या कदम उठाए जाएंगे। शिक्षक-महिला समूह पर क्या कार्रवाई हुई। केस की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी।
भोजन गरिमा के साथ न होने पर हाईकोर्ट (High Court) ने नाराजगी जाहिर की
दरअसल, 29 जुलाई को बलौदाबाजार जिले के पलारी ब्लॉक के लच्छनपुर गांव के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील के नाम पर बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां मध्यान्ह भोजन के लिए बच्चों को दिए जाने वाले खाना को आवारा कुत्तों ने जूठा कर दिया था।
छात्रों ने जब शिकायत की, तब भी उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया और उन्हें कुत्तों के जूठे भोजन को परोस दिया गया।
जब छात्रों ने यह बात अभिभावकों को बताई तो स्कूल समिति की बैठक हुई और दबाव में आकर विद्यार्थियों को दो डोज एंटी रेबीज वैक्सीन दी गई।
मीडिया में आई खबरों के मुताबिक 84 बच्चों ने भोजन किया, जिसमें से 78 को वैक्सीन दी गई। इसी पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है।
हाईकोर्ट(High Court बोला- लापरवाही नहीं, बच्चों की जान से खिलवाड़
चीफ जस्टिस सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि छात्रों को परोसा जाने वाला भोजन कोई औपचारिकता नहीं है, यह गरिमा के साथ होना चाहिए।
कुत्ते का जूठा भोजन परोसना न सिर्फ लापरवाही है बल्कि बच्चों की जान को सीधा खतरे में डालना है। एक बार रेबीज हो जाने पर इलाज संभव नहीं होता। कोर्ट ने घटना को गंभीर प्रशासनिक विफलता और अमानवीय कृत्य करार दिया है।
उच्च न्यायालय (High Court) क्या है?
उच्च न्यायालय किसी राज्य का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है। यह राज्य के कानूनों और संविधान की व्याख्या करता है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है।
भारत में कुल कितने उच्च न्यायालय हैं?
वर्तमान में भारत में कुल 25 उच्च न्यायालय हैं, जिनमें से कई राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय है।