भारी बारिश से तबाही
हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बारिश के कारण शुक्रवार को कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं। स्थानीय मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने राज्य के कुछ इलाकों में 22, 23, 25 और 26 जून को अत्याधिक भारी बारिश के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। हिमाचल प्रदेश (Himanchal Pradesh) के कई इलाकों में भारी बारिश हुई, जिससे कई इलाकों में भूस्खलन हुआ। स्थानीय मौसम विभाग ने शुक्रवार को 22, 23, 25 और 26 जून को अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की। धर्मशाला-चतारो-गग्गल मार्ग पर भूस्खलन के कारण यातायात प्रभावित हुआ। अधिकारी फिलहाल सड़क साफ करने के काम में लगे हुए हैं। इसके अलावा, ऊपरी शिमला क्षेत्र में टौनी-हाटकोटी सड़क का एक हिस्सा भी भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हो गया।
भूस्खलन से यातायात बाधित
अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन के कारण धर्मशाला-चतरो-गगल मार्ग पर यातायात बाधित हो गया है और सड़क को दोबारा चालू करने का काम जारी है। वहीं, अपर शिमला क्षेत्र में ताउणी-हाटकोटी मार्ग का एक हिस्सा भी भूस्खलन की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया है। पंडोह के शहीद इंदर सिंह मिडिल स्कूल में जलभराव की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग ने रविवार, सोमवार, बुधवार और बृहस्पतिवार के लिए कुछ स्थानों पर अत्याधिक भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट और मंगलवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। राज्य में सबसे अधिक बारिश नाहन में 84.7 मिमी दर्ज की गई, इसके बाद पंडोह में 35 मिमी, स्लैपर में 26.3 मिमी, सराहन में 20.5 मिमी, पांवटा साहिब में 19.8 मिमी, जोगिंदरनगर में 19 मिमी, पच्छाद में 17.2 मिमी, रामपुर में 15.6 मिमी और गोहर में 15 मिमी बारिश हुई।
इन जगहों पर गरज के साथ हुई बारिश
सुंदरनगर, शिमला और कांगड़ा में गरज के साथ बारिश हुई, जबकि बजौरा में 37 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मध्य और निचले पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से भूस्खलन, कीचड़ धंसने, निचले क्षेत्रों में जलभराव, कमजोर संरचनाओं को आंशिक नुकसान, फिसलन भरी सड़कों पर वाहन फिसलने और दृश्यता बाधित होने की समस्या हो सकती है। पूर्वानुमान के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मध्य और निचले पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से भूस्खलन, कीचड़ धंसने, निचले क्षेत्रों में जलभराव, कमजोर संरचनाओं को आंशिक नुकसान, फिसलन भरी सड़कों पर वाहन फिसलने और दृश्यता बाधित होने की समस्या हो सकती है।
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