National-सर्वाइकल कैंसर के अंत की उम्मीद? वैज्ञानिकों की नई पहल

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सर्वाइकल कैंसर
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नई दिल्ली। चिकित्सा जगत के इतिहास में एक ऐसा अध्याय लिखा जा रहा है जो भविष्य में करोड़ों महिलाओं का जीवन सुरक्षित कर सकता है। जिस सर्वाइकल कैंसर (Cervical cancer) (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) को अब तक एक गंभीर और जानलेवा बीमारी माना जाता था, अब उसे नियंत्रित और खत्म करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।

जागरूकता और इलाज से बदलती तस्वीर

कई महिलाएं जानकारी के अभाव में इस बीमारी का शिकार हो जाती हैं, लेकिन अब जागरूकता, टीकाकरण और समय पर जांच से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

भारत में स्वदेशी वैक्सीन से उम्मीद

भारत के लिए भी यह खबर बड़ी राहत लेकर आई है। देश में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है, लेकिन अब भारत ने अपनी पहली स्वदेशी वैक्सीन ‘सर्वावैक’ विकसित कर ली है, जिससे यह टीका अधिक किफायती और सुलभ हो गया है।

किशोरियों के लिए विशेष अभियान

सरकार ने 9 से 14 वर्ष की किशोरियों के लिए राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू किया है, ताकि शुरुआती उम्र में ही इस बीमारी से सुरक्षा दी जा सके।

ऑस्ट्रेलिया बना मिसाल

मीडिया रिपोर्ट (Media Report) के अनुसार ऑस्ट्रेलिया इस दिशा में दुनिया के लिए उदाहरण बनकर उभरा है। वह 2035 तक सर्वाइकल कैंसर को लगभग खत्म करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

गार्डासिल वैक्सीन से मिली गति

इस अभियान की शुरुआत 2006 में गार्डासिल वैक्सीन के उपयोग से हुई थी। आज वहां स्कूल स्तर पर लड़के और लड़कियों दोनों को यह टीका मुफ्त लगाया जाता है।

आसान जांच से बेहतर परिणाम

तकनीक के विकास के कारण अब महिलाएं खुद सैंपल लेकर जांच कर सकती हैं, जिससे समय पर पहचान और इलाज संभव हो पाया है। इसी का परिणाम है कि 2021 में ऑस्ट्रेलिया में 25 साल से कम उम्र की महिलाओं में इस कैंसर का कोई नया मामला सामने नहीं आया। स्वीडन और रवांडा जैसे देश भी 2027 तक इस कैंसर को खत्म करने का लक्ष्य लेकर काम कर रहे हैं।

चुनौतियों के बीच उम्मीद कायम

हालांकि फंडिंग और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियां सामने हैं, लेकिन भारत की स्वदेशी वैक्सीन ने विकासशील देशों के लिए एक नया रास्ता खोला है।

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रोग-मुक्त भविष्य की ओर कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर टीकाकरण और नियमित जांच के जरिए इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यह एक बड़ी चिकित्सा उपलब्धि के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य का संकेत भी है।

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Anuj Kumar

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Anuj Kumar

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