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Iran War- ईरान युद्ध का असर- भारत के 10.68 अरब डॉलर के कृषि-डेयरी निर्यात पर खतरा

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: March 30, 2026 • 5:46 PM
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नई दिल्ली । अमेरिका, इजरायल और ईरान (Israel and Iran) के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर भारत के कृषि और डेयरी निर्यात पर पड़ रहा है, जो अब लॉजिस्टिक्स बाधाओं और बढ़ती लागत के कारण दबाव में है।

10.68 अरब डॉलर के निर्यात पर खतरा

खाड़ी और मध्य पूर्व के देशों को होने वाला भारत का करीब 10.68 अरब डॉलर का कृषि-डेयरी निर्यात अब संकट में है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज (Strait of Hormuzz) में अवरोध की स्थिति ने मालवाहक जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।

गल्फ देशों पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती

गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के देश जैसे यूएई, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, कतर (Quatar) और बहरीन भारत के प्रमुख निर्यात बाजार हैं। इनके अलावा इराक और यमन भी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं, जहां भारत का करीब 20.5% कृषि निर्यात जाता है।

इन उत्पादों पर सबसे ज्यादा असर

मौजूदा हालात का सबसे ज्यादा असर बासमती चावल, भैंस का मांस, ताजे फल-सब्जियां, मसाले और डेयरी उत्पादों पर पड़ रहा है। लगातार एक महीने से अधिक समय तक स्थिति सामान्य न होने से निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।

सरकार ने सक्रिय किया अंतर-मंत्रालयी समूह

2 मार्च को केंद्र सरकार ने सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह सक्रिय किया है।इसमें पोत परिवहन, पेट्रोलियम, वित्तीय सेवाएं, डीपीआईआईटी, सीबीआईसी, विदेश मंत्रालय और आरबीआई जैसी एजेंसियां शामिल हैं, जो स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं।

निर्यातकों को राहत देने के लिए विशेष कदम

सरकार ने निर्यातकों को राहत देने के लिए कई फैसले लिए हैं।

बंदरगाहों पर 24×7 निगरानी और सुविधा

प्रमुख बंदरगाहों पर 24 घंटे नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं। न्हावा शेवा बंदरगाह, मुंद्रा बंदरगाह और कांडला बंदरगाह पर अतिरिक्त स्टोरेज, जल्दी खराब होने वाले सामान को प्राथमिकता और शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।

वैकल्पिक रास्तों की तलाश में सरकार

विदेश मंत्रालय वैकल्पिक समुद्री मार्गों की तलाश कर रहा है, जबकि पेट्रोलियम मंत्रालय जहाजों की लगातार ट्रैकिंग कर रहा है। सरकार पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।

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निर्यातकों की बढ़ती चिंता

निर्यातकों ने माल ढुलाई दरों में वृद्धि, युद्ध-जोखिम अधिभार, कंटेनरों की कमी, शिपमेंट में देरी और बंदरगाहों पर भीड़ जैसी समस्याओं की जानकारी दी है। ऐसे में अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो इसका असर भारत के निर्यात पर और गहरा सकता है।

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