National- पेट्रोल-डीजल के दाम में फिर लग सकती है आग, बढ़ोतरी के और संकेत

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पेट्रोल-डीजल
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मुख्य बातें: 

  • देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है
  • इस बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतों में भारी उछाल के बीच देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल (Petrol and Diesel) के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी, लेकिन तेल कंपनियों का कहना है कि इससे उनका पूरा घाटा नहीं भर पाएगा।चार वर्षों बाद हुई इस बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार

रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में पिछले ढाई महीने से जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद से कच्चे तेल के दाम में 50 प्रतिशत से अधिक उछाल आया है। एक समय इसकी कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी और फिलहाल भी यह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है।

तेल कंपनियों को भारी घाटा

उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मौजूदा कीमतों पर सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, हालिया बढ़ोतरी के बाद भी पेट्रोल पर करीब 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 39 रुपये प्रति लीटर का घाटा जारी है। इससे पहले कंपनियों को पेट्रोल पर 14 रुपये और डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा था।

आगे और महंगा हो सकता है ईंधन

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में केवल 3 रुपये की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर से इजाफा किया जा सकता है।

सरकार ने बदले टैक्स नियम

सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का अप्रत्याशित लाभ कर लगाया है। वहीं डीजल पर कर घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन (ATF) पर कर घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। नई दरें 16 मई से लागू हो चुकी हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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घरेलू उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश

सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए ये कदम उठाए गए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि वैश्विक स्तर पर तनाव जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

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Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

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