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National- भारत की कूटनीतिक बढ़त, अब चीन और बांग्लादेश भी भारतीय नियमों के साथ तैयार

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: February 23, 2026 • 1:58 PM
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नई दिल्ली,। चीन कल तक सीमा पर आंखें दिखाता था और हर बात पर ऐंठता था, वह आज भारत के बनाए नियमों पर कदमताल कर रहा है। बांग्लादेश जैसा पड़ोसी, जो कभी-कभार दूसरे देशों के बहकावे में आ जाता था, वह भी अब दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है। दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) के बाद जारी घोषणा-पत्र पर दुनिया के 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के हस्ताक्षर हुए। इसमें चीन भी शामिल है और बांग्लादेश भी। 89 देशों का एक मंच पर आना और भारत के नेतृत्व को स्वीकार करना बताता है कि वैश्विक मंच पर भारत का कद लगातार ऊंचा हो रहा है।

‘एआई फॉर ऑल’ ने बदली वैश्विक सोच

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और यूरोप लंबे समय से तकनीक को अपनी बपौती मानते आए हैं। उनका मानना रहा है कि जो तकनीक बनाएगा, वही उसका मालिक होगा और वही मुनाफा कमाएगा। लेकिन भारत ने दुनिया के सामने एक अलग विजन रखा—‘एआई फॉर ऑल’ (AI For All) यानी सबके लिए एआई। भारत ने स्पष्ट किया कि एआई कुछ अमीर देशों या बड़ी टेक कंपनियों का एकाधिकार नहीं हो सकता। इसका लाभ दुनिया के हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इस विचार ने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के उन देशों का भरोसा जीता, जिन्हें डर था कि वे एआई की दौड़ में पीछे छूट जाएंगे।

चीन की रणनीति में बदलाव

रिपोर्ट के अनुसार चीन आमतौर पर भारत के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में अड़ंगा लगाता रहा है—चाहे वह संयुक्त राष्ट्र की स्थायी सदस्यता का मुद्दा हो या आतंकवादियों को प्रतिबंधित कराने का मामला। लेकिन एआई के मुद्दे पर चीन भारत के साथ मंच साझा करता दिख रहा है। इसकी एक बड़ी वजह उसकी बदली रणनीति मानी जा रही है। पाकिस्तान में चीन द्वारा शुरू किया गया चीन-पाक आर्थिक गलियारा (CPEC) आतंकी हमलों और पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली के कारण प्रभावित हुआ है। साथ ही अमेरिका और यूरोप पहले ही चीनी एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगा चुके हैं। चीन समझता है कि यदि वह भारत की अगुवाई वाले इस वैश्विक एआई मंच से बाहर रहा, तो भविष्य की तकनीकी मुख्यधारा से कट सकता है।

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बांग्लादेश का समर्थन : कूटनीतिक संकेत

घोषणा-पत्र का समर्थन करने वालों में बांग्लादेश का नाम आना भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। हाल के समय में वहां राजनीतिक अस्थिरता और भारत-विरोधी सुरों की चर्चाएं होती रही थीं। बावजूद इसके, जब बात एआई और आर्थिक भविष्य की आई, तो बांग्लादेश ने भारत के साथ खड़े होने का फैसला किया। यह दक्षिण एशिया में भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति की मजबूती को दर्शाता है। बांग्लादेश जानता है कि युवाओं के लिए रोजगार और आधुनिक अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए उसे भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे यूपीआई और एआई फ्रेमवर्क के साथ जुड़ना होगा। भारत का दृष्टिकोण छोटे देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है और यही कारण है कि क्षेत्रीय देशों का भरोसा नई दिल्ली पर बढ़ रहा है।

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