National- रूस से तेल आयात पर भारत का रुख साफ, पीयूष गोयल ने की स्थिति स्पष्ट

By Anuj Kumar | Updated: February 9, 2026 • 11:53 AM

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर देश का दृष्टिकोण स्पष्ट किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका से कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी (LNG and LPG) की खरीद भारत के रणनीतिक हितों के अनुकूल है, क्योंकि इससे भारत को अपने ऊर्जा संसाधनों में विविधता लाने का अवसर मिलता है। गोयल के अनुसार, व्यापार समझौते का मुख्य उद्देश्य दो देशों के बीच कारोबार के रास्ते को सुगम बनाना और प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारतीय उत्पादों को विशेष पहुंच प्रदान करना है।

व्यापार समझौते का मकसद और भारत की बढ़त

उन्होंने बताया कि वर्तमान में 18 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क होने के बावजूद, यह समझौता भारत को अन्य विकासशील देशों के मुकाबले बढ़त दिलाता है, जो वैश्विक बाजार में भारत के प्रमुख प्रतिस्पर्धी हैं। इससे भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

पांच साल में 500 अरब डॉलर के आयात का लक्ष्य

भारत की भविष्य की ऊर्जा और तकनीकी जरूरतों पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत को अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने में कोई कठिनाई नहीं होगी। उन्होंने इस लक्ष्य को रूढ़िवादी बताते हुए कहा कि 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था (Economics) बनने की दिशा में बढ़ रहे भारत के लिए यह आंकड़ा बहुत बड़ा नहीं है।

विमानन और अन्य क्षेत्रों में भारी जरूरत

गोयल ने स्पष्ट किया कि अकेले विमानन क्षेत्र के लिए ही भारत को 100 अरब डॉलर से अधिक के निवेश और आयात की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, भारत वर्तमान में अन्य देशों से जो 300 अरब डॉलर का आयात कर रहा है, उसे भी अमेरिकी बाजार की ओर मोड़ा जा सकता है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार संबंध और मजबूत होंगे।

तेल खरीद पर फैसला बाजार करेगा, सरकार नहीं

रणनीतिक पहलुओं पर बात करते हुए पीयूष गोयल ने साफ किया कि व्यापार समझौता यह तय नहीं करता कि कौन खरीदार किससे और क्या खरीदेगा। तेल या अन्य संसाधनों की खरीद के फैसले मुख्य रूप से घरेलू खरीदारों द्वारा लिए जाते हैं। रूसी तेल की खरीद को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह विषय उनके मंत्रालय के दायरे में नहीं आता और इस पर विदेश मंत्रालय अधिकृत रूप से स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

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ऊर्जा, रक्षा और तकनीक में साझेदारी मजबूत

दोनों देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों, विमानों के पुर्जे, कीमती धातुओं, प्रौद्योगिकी उत्पादों और कोकिंग कोयले की खरीद में गहरी रुचि दिखाई है। यह समझौता न केवल भारत-अमेरिका व्यापार घाटे को कम करने में सहायक होगा, बल्कि भारत की ऊर्जा और रक्षा सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगा। पीयूष गोयल के बयानों से यह स्पष्ट है कि भारत अपनी संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए अमेरिका के साथ एक मजबूत और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी की ओर आगे बढ़ रहा है

पीयूष गोयल अभी कौन से मंत्री हैं?

श्री पीयूष गोयल (54) भारत सरकार में रेलवे मंत्री तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री हैं । वे भारतीय संसद के उच्च सदन (राज्य सभा) के सदस्य हैं तथा पूर्व (2017 – 19) में रेलवे एवं कोयला मंत्री थे । उनके पास दो बार वर्ष 2018 और 2019 में वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी था ।

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